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Men are from Mars women are from Venues (Hindi)

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Men are from Mars women are from Venues (Gujrati)

फ़ाइल:
PDF, 61.74 MB
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MY LIFE WITH THE HAIRY PEOPLE

साल:
2014
भाषा:
english
फ़ाइल:
PDF, 3.68 MB
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मेन आर फ़्रॉम मार्स, विमेन आर फ़्रॉम वीनस





मेन आर फ़्रॉम मार्स, विमेन आर फ़्रॉमवीनस.




जॉन ग्रे





अनुवादक : डॉ. सुधीर दीक्षित, रजनी दीक्षित





मंजुल पब्लिशिंग हाउस





मंजुल पब्लिशिंग हाउस

कॉरपोरेट एवं संपादकीय कार्यालय

द्वितीय तल, उषा प्रीत कॉम्प्लेक्स, 42 मालवीय नगर, भोपाल - 462 003

विक्रय एवं विपणन कार्यालय

7/32, भू तल, अंसारी रोड, दरियागंज, नई दिल्ली - 110 002

वेबसाइट : www.manjulindia.com

वितरण केन्द्र

अहमदाबाद, बेंगलुरू, भोपाल, कोलकाता, चेन्नई,

हैदराबाद, मुम्बई, नई दिल्ली, पुणे


जॉन ग्रे द्वारा लिखित मूल अंग्रेजी पुस्तक

मेन आर फ़्राॅम मार्स, विमेन आर फ़्राॅम वीनस का संक्षिप्त हिन्दी अनुवाद


हार्पर कॉलिन्स पब्लिशर्स ( न्यू यॉर्क ) द्वारा पहली बार प्रकाशित

लिन्डा माइकल्स लि . के सहयोग से प्रकाशित


यह हिन्दी संस्करण 2003 में पहली बार प्रकाशित

चौदहवां संस्करण 2016


कॉपीराइट © जॉन ग्रे 1992


ISBN 978-81-86775-48-6


हिन्दी अनुवाद : डाँ . सुधीर दीक्षित, रजनी दीक्षित


सर्वाधिकार सरक्षित । यह पुस्तक इस शर्त पर विक्रय की जा रही है कि प्रकाशक की लिखित पूर्वानुमति के बिना इसे या इसके किसी भी हिस्से को न तो पुन: प्रकाशित किया जा सकता है और न ही किसी भी अन्य तरीक़े से, किसी भी रूप में इसका व्यावसायिक उपयोग किया जा सकता है । यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी ।





यह पुस्तक बड़े प्यार से समर्पित है

मेरी प्यारी पत्नी बॉनी ग्रे को ।

उसके प्रेम, समझदारी और शक्ति ने मुझे बेहतर

बनने के लिए प्रेरित किया, और यह भी सिखाया कि

हम साथ-साथ सुखी कैसे रह सकते हैं।





विषय-सूची

प्रस्तावना

1.पुरुष मंगल ग्रह से आए हैं, महिलाएँ शुक्र ग्रह से आई हैं

2.श्रीमान - “समस्या-सुलझाने-वालें” और श्रीमती “घर–सुधार समिति”

3.पुरुष अपनी गुफा में चले जाते हैं और महिलाएँ बोलती बहुत हैं

4.जीवनसाथी को प्रेरित कैसे करें

5.दोनों अलग–अलग भाषाएँ बोलते हैं

6.पुरुष रबर बैंड की तरह होते हैं

7.महिलाएँ लहरों की तरह होती हैं

8.दोनों की भावनात्मक आवश्यकताएँ अलग–अलग होती हैं

9.बहस से कैसे बचा जाए

10.अपने प्रेमी या अपनी प्रेमिका का दिल कैसे जीतें

11.जब आप परेशान हों तो प्रेमपत्र लिखें

12.सहायता कैसे माँगें और पाएँ

13.प्यार के जादू को ज़िंदा कैसे रखें





प्रस्तावना


मेरी बेटी ल; ॉरेन को पैदा हुए सिर्फ़ सात दिन ही हुए थे । मैं और मेरी पत्नी बॉनी बुरी तरह थके हुए थे । हर रात लॉरेन हमें सोने नहीं देती थी । बॉनी को दर्द की दवा लेनी पड़ती थी । चलने - फिरने में भी उसे दिक्क़त होती थी । पाँच दिन तक घर पर उसकी देखभाल करने के बाद मैंने सोचा कि अब उसकी हालत पहले से सुधर गई है और इसलिए मैं ऑफ़िस चला गया ।

जब मैं ऑफ़िस में था, तो बॉनी की दर्द की गोलियाँ ख़त्म हो गईं । बजाय इसके कि वह ऑफ़िस में फ़ोन करके मुझे बताती, उसने मेरे भाई से गोलियाँ लाने के लिए कहा, जो उसके हालचाल पूछने गया था । भाई भूल गया और लौटकर नहीं आया । नतीजा यह हुआ कि पूरे दिन बॉनी दर्द से कराहती रही और अकेले ही बच्ची को सँभालती रही ।

जब मैं लौटा तो वह बुरी तरह दुखी थी । मैंने सोचा शायद वह अपनी तकलीफ़ के लिए मुझे ज़िम्मेदार ठहरा रही थी । मुझे लगा वह अपनी परेशानियों के लिए मुझे दोष दे रही थी ।

उसने कहा, “मैं पूरे दिन दर्द से तड़पती रहीं. . . . मेरी दर्द की गोलियाँ ख़त्म हो गई थीं । मैं बिस्तर से उठ नहीं सकती और किसी को मेरी परवाह नहीं है!”

मैंने रक्षात्मक अंदाज़ में कहा, “तुमने मुझे फ़ोन क्यों नहीं किया?”

उसने जवाब दिया, “मैंने तुम्हारे भाई से गोलियाँ लाने के 10 मेन आर फ़्राॅम मार्स, विमेन आर फ़्राॅम वीनस लिए कहा था, परंतु वह भूल गया ! मैं सारा दिन उसके लौटने का इंतज़ार करती रही । मैं इसके सिवा कर भी क्या सकती थी ? मैं तो बिस्तर से हिल भी नहीं सकती । मैं बहुत अकेला महसूस कर रही हूँ ?”

इस बिंदु पर मैं फट पड़ा । उस दिन मेरा पारा भी चढ़ा हुआ था । मैं इसलिए ग़ुस्सा था क्योंकि उसने मुझे फ़ोन नहीं किया था । मैं इसलिए ग़ुस्सा था क्योंकि जब मुझे उसके दर्द का पता ही नहीं था, फिर वह मुझे दोषी क्यों मान रही थी ? कुछ कटु शब्द कहने के बाद मैं दरवाज़े की तरफ़ बढ़ा । मैं थका हुआ था, चिड़चिड़ा था और मैं और ज़्यादा शिकायतें नहीं सुनना चाहता था । हम दोनों ही अपना अापा खो चुके थे ।

फिर ऐसा कुछ हुआ जिसने मेरी ज़िंदगी बदल दी ।

बॉनी ने कहा, "ज़रा ठहरो, प्लीज़ मुझे छोड़कर मत जाओ । इसी वक़्ते तो मुझे तुम्हारी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है । मैं दर्द में तड़प रही हूँ । मैं कई दिनों से सोई नहीं हूँ । प्लीज़ मेरे पास बैठकर मेरी बात सुनो ।”

मैं एक पल ठहर गया ।

उसने कहा, “जॉन ग्रे, तुम बड़े मतलबी दोस्त हो, तुम केवल अच्छे वक़्त के साथी हो । जब तक मैं अच्छी और प्यारी बॉनी हूँ, तब तक तो तुम मेरे आगे-पीछे घूमते रहते हो, परंतु जब मैं परेशान या दुखी होती हूँ, तो तुम मुझे छोड़कर चल देते हो ।”

फिर वह थोड़ा ठहरी और मैंने देखा उसकी आँखों में आँसू थे । उसने कहा, “अभी मैं कष्ट में हुँ । मेरे पास तुम्हें देने के लिए कुछ नहीं है, इसी वक़्त मुझे तुम्हारी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है । प्लीज़ यहाँ आओ और मुझे थामो । तुम्हें कुछ कहने की ज़रूरत नहीं है । मैं सिर्फ़ इतना चाहती हूँ कि तुम मुझे बाँहों में ले लो । प्लीज़, मुझे छोड़कर मत जाओ ।”

मैंने उसे अपनी बाँहों में ले लिया । वह मेरे कंधे पर सिर रखकर रोती रही । कुछ मिनट बाद उसने मुझे धन्यवाद दिया कि उसके मुश्किल समय में मैं उसे अकेला छोड़कर नहीं गया था ।

उसी क्षण मैंने प्रेम का सच्चा अर्थ समझना शुरू किया-बिना शर्त का प्रेम । मैं अपने आपको अच्छा प्रेमी समझा करता था, परंतु शायद मेरी पत्नी सही कहती थी । मैं मतलबी इन्सान था, मैं केवल अच्छे वक़्त का साथी था । जब तक वह ख़ुश और बढ़िया रहती थी, मैं उसे बदले में प्रेम देता था । परंतु जब वह नाख़ुश या अपसेट रहती थी, मुझे ऐसा लगता था जैसे वह मुझे दोष दे रही है और फिर मैं या तो बहस करने लगता था या उससे दूर चला जाता था ।

उस दिन पहली बार मैं उसे छोड़कर नहीं गया । मैं ठहर गया और इससे मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ । जब उसे सचमुच मेरी ज़रूरत थी, तब मैं उसे प्रेम दे रहा था । यही तो सच्चे प्रेम का अर्थ था । जब मुझे रास्ता दिखा दिया गया, तो मेरे लिए प्रेम करना कितना आसान हो गया ।

मैं यह अपने आप क्यों नहीं समझ पाया था ? उसे सिर्फ़ यह चाहिए था कि मैं उसे बाँहों में ले लूँ ताकि वह मेरे कंधे पर सिर रखकर रो सके । शायद दूसरी महिला अपने आप समझ जाती कि बॉनी को क्या चाहिए था । परंतु चूँकि मैं एक पुरुष था, इसलिए मुझे यह पता नहीं था कि छूना, आलिंगन करना, बाँहों में लेना, उसकी बात सुनना उसके लिए इतना ज़्यादा महत्वपूर्ण था । मेरे और उसके बीच के अंतर को जान लेने के बाद हमारे बीच के संबंध और मधुर हो गए ।

इससे मुझे इस बात की प्रेरणा भी मिली कि मैं इस विषय पर शोध करूँ कि पुरुष स्वभाव और महिला स्वभाव में क्या अंतर होते हैं । सात साल के शोध के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि पुरुष अलग तरह से सोचते हैं, महिलाएँ अलग तरह से और दोनों के बीच विवाद अक्सर इसी कारण होते हैं क्योंकि दोनों को ही अपनी भिन्नताओं का पता नहीं होता ।

जब मैंने सेमिनारों में इस बारे में विस्तार से बताया तो हज़ारों शादियाँ टूटने से बच गईं । लोग मुझे धन्यवाद देते हैं कि मैंने उनकी शादी टूटने से बचा ली है, सच तो यह है कि प्रेम के कारण उनकी शादी बच गई, परंतु यह भी सच है कि अगर उन्हें अपोज़िट सेक्स के सोचने के तरीक़े की जानकारी नहीं होती, तो उनमें निश्चित रूप से तलाक़ हो जाता ।

हालाँकि सभी इस बात पर सहमत हैं कि पुरुषों और महिलाओं में भिन्नता होती है, परंतु वे कितने भिन्न होते हैं, यह ज़्यादातर लोग नहीं जान पाते । मैंने 25,000 लोगों के सर्वे के बाद यह खोज ही लिया कि महिला और पुरुष कितने और किस तरह भिन्न होते हैं ।

इस पुस्तक में दिए गए सभी सिद्धांत आज़माए हुए हैं, । 25,000 लोगों में से 90 प्रतिशत लोगों को इस पुस्तक में अपनी झलक दिखी । अगर आप इस पुस्तक को पढ़ते समय सिर हिला रहे हों और कह रहे हों, “हाँ, आप मेरे बारे में ही बात कर रहे हैं,” तो आप अकेले नहीं हैं । इस पुस्तक से हज़ारों लोगों को लाभ पहुँचा है, और आपको भी पहुँच सकता है ।

बहुत सारे लोग अपने वैवाहिक जीवन में संघर्ष करते रहते हैं । उनके जीवन में इतना तनाव, द्वेष और झगड़ा सिर्फ़ इसलिए होता है क्योंकि वे एक-दूसरे को नहीं समझ पाते । हालाँकि वे अपने पार्टनर को प्रेम करते हैं, परंतु जब तनाव होता है तो वे नहीं जानते कि ऐसे समय माहौल को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है । जब आप यह जान लेंगे कि महिलाएँ किस तरह सोचती हैं, व्यवहार करती हैं, किस तरह प्रतिक्रिया करती हैं तो आप उनसे बेहतर रिश्ता बना सकेंगे ।

पुरुष और महिलाएँ न सिर्फ़ अलग-अलग तरीक़ों से बोलते हैं, बल्कि वे अलग-अलग तरीक़ों से सोचते, महसूस करते, देखते, प्रतिक्रिया करते, प्रेम करते, तारीफ़ करते हैं । ऐसा लगता है जैसे वे अलग-अलग ग्रहों से आए हैं, उनकी भाषाएँ अलग हैं और उन्हें अलग-अलग चीज़ों की ज़रूरत होती है ।

भिन्नताओं को समझ लेने के बाद हमारे लिए अपोज़िट सेक्स को समझना आसान हो जाता है । हमारी ग़लतफ़हमियाँ दूर हो जाती हैं । हम सामने वाले से जो अपेक्षाएँ रखते हैं, उनमें भी सुधार हो जाता है । जब आप यह जान लेते हैं कि सामने वाला आपसे उतना ही अलग है जितना कि कोई दूसरे ग्रह का प्राणी, तो आप उसे बदलने की कोशिश नहीं करते, बल्कि निश्चिंत होकर उसके साथ सहयोग करते हैं ।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पुस्तक में आपको हर जगह वैवाहिक समस्याओं को सुलझाने के प्रैक्टिकल तरीक़े मिलेंगे । विवाह में समस्याएँ तो रहेंगी, क्योंकि पुरुष मंगल ग्रह से आए हैं और महिलाएँ शुक्र ग्रह से आई हैं । परंतु अगर आप अपने बीच के अंतर को समझ लें तो आपकी आधी समस्याएँ तो अपने आप ही दूर हो जाएँगी ।

इस पुस्तक के बारे में इकलौती आलोचना यही हुई, “काश आपने हमें यह पहले बताया होता !”

इस पुस्तक को लिखने का मेरा उद्देश्य यही है कि आपका विवाह सुखमय हो, शांतिपूर्ण हो । यह ज़रूरी है कि सुखी विवाहों की संख्या बढ़े और तलाक़ों की संख्या घटे - क्योंकि हमारे बच्चे बेहतर दुनिया में जीने योग्य हैं ।





अध्याय 1

पुरुष मंगल ग्रह से आए हैं, महिलाएँ शुक्र ग्रह से आई हैं


कल्पना कीजिए कि पुरुष मंगल ग्रह से आए हैं और महिलाएँ शुक्र ग्रह से । बहुत पहले की बात है । एक दिन मंगल ग्रह के पुरुष अपनी दूरबीन से अंतरिक्ष में देख रहे थे । तभी उन्हें शुक्र ग्रह पर महिलाएँ दिखीं । सिर्फ़ उनकी एक झलक ने ही मंगल ग्रह के पुरुषों को मोहित कर दिया । उन्हें पहली नज़र में ही शुक्र ग्रह की महिलाओं से प्यार हो गया और वे तत्काल अंतरिक्ष यान बनाकर शुक्र ग्रह की तरफ़ चल पड़े ।

शुक्र ग्रह की महिलाओं ने मंगल ग्रह के पुरुषों का बाँहें फैलाकर स्वागत किया । वे सहज अनुभूति से जानती थीं कि ऐसा दिन आएगा जब मंगल ग्रह के पुरुष उनके ग्रह पर आएँगे । उनके दिल में ऐसा प्रेम उमड़ रहा था जो उन्हें इससे पहले कभी महसूस नहीं हुआ था ।

मंगल ग्रह के पुरुषों और शुक्र ग्रह की महिलाओं का प्रेम जादुई था । उन्हें साथ रहने में आनंद आता था, साथ–साथ काम करना अच्छा लगता था और एक–दूसरे से बातें करते हुए वे कभी नहीं थकते थे । हालाँकि वे अलग–अलग ग्रहों के थे, परंतु आपसी भिन्नताओं के कारण उनका आनंद और भी बढ़ गया था । उन्होंने एक–दूसरे को जानने, सीखने और समझने में महीनों लगा दिए ताकि वे एक–दूसरे की ज़रूरतें, रुचियाँ, व्यवहार के तरीके समझ सकें । सालों तक वे प्रेम और सौहार्द्र के माहौल में रहे ।

फिर एक दिन उन्होंने धरती पर जाकर रहने का फ़ैसला किया । यहाँ उन्हें शुरुआत में तो हर चीज़ बहुत अद्भूत और सुंदर लगी । परंतु धरती के माहौल ने अपना असर दिखाया और एक सुबह जब वे जागे तो उनकी याददाश्त जा चुकी थी । वे भूल गए कि वे–अलग–अलग ग्रहों से आए थे और वे यह भी भूल गए कि अलग–अगल ग्रहों से आने के कारण उनमें भिन्नताएँ होना स्वाभाविक था । वे अपनी भिन्नताओं के बारे में भूल गए । उसी दिन से पुरुष और महिला आपस में लड़ने लगे ।

अपनी भिन्नताएँ याद रखना

यह जाने बिना कि हममें भिन्नताएँ हैं, पुरुष और महिला हमेशा एक–एक–दूसरे से लड़ते ही रहेंगे । हम आम तौर पर अपोज़िट सेक्स से इसलिए परेशान रहते हैं क्योंकि हम इस महत्वपूर्ण सत्य को भूल चुके हैं । हम चाहते हैं कि अपोज़िट सेक्स का व्यक्ति भी हमारे जैसा ही हो । उसकी भी वही इच्छाएँ हों, जो हमारी हैं और वह भी उसी तरीक़े से सोचे जिस तरह से हम सोचते हैं ।

पुरुष आशा करते हैं कि महिलाएँ उसी तरह से सोचें और बातें करें जिस तरह से पुरुष करते हैं । महिलाएँ उम्मीद करती हैं कि पुरुष उसी तरह से अनुभव करें और चर्चा करें जिस तरह से महिलाएँ करती हैं । हम यह भूल गए हैं कि पुरुष और महिलाएँ अलग–अलग–तरह से सोचते, बोलते और व्यवहार करते हैं । उनमें भिन्नता स्वाभाविक है । इसका परिणाम यह होता है कि हममें अनावश्यक संघर्ष और तनाव होता है ।

परंतु जब आप यह जान लेते हैं कि पुरुष मंगल ग्रह से आए हैं और महिलाएँ शुक्र ग्रह से आई हैं, तो आपकी सारी दुविधा समाप्त हो जाती है और आप प्रेम से एक साथ रह सकते हैं ।

अच्छे इरादे ही काफ़ी नहीं हैं

प्रेम में पड़ना जादुई अनुभव है । ऐसा लगता है दीवानगी का यह दौर हमेशा चलता रहेगा और कभी ख़त्म नहीं होगा । हम नादानी में ऐसा सोचते हैं कि हमारे जीवन में वे समस्याएँ नहीं आएँगी जो हमारे माता–पिता या दूसरे लोगों के वैवाहिक जीवन में आई थीं । हम यह सोचते हैं कि हम ज़िंदगी भर एक–दूसरे के दीवाने बने रहेंगे और ख़ुशी–ख़ुशी एक–दूसरे के साथ जीवन बिता देंगे ।

परंतु जादू धीरे–धीरे कम होता जाता है और शादी के कुछ समय बाद ही हमें एक–दूसरे की कमियाँ नज़र आने लगती हैं । पुरुष यह अपेक्षा रखते हैं कि महिलाएँ उनकी तरह सोचें और व्यवहार करें, जबकि महिलाएँ यह उम्मीद करती हैं कि पुरुष महिलाओं की तरह सोचें । चूँकि उन्हें अपनी भिन्नताओं का एहसास नहीं होता इसलिए वे एक–दूसरे को ठीक से समझ नहीं पाते और एक–दूसरे की भावनाओं का सम्मान नहीं कर पाते । प्रेम से शुरू हुई बहुत सी कहानियाँ इसीलिए तलाक़ पर ख़त्म होती हैं, क्योंकि समस्याएँ धीरे–धीरे बढ़ने लगती हैं । दोनों की बोलचाल कम होती जाती है । आपसी विश्वास कम होने लगता है । दोनों एक–एक–दूसरे को नीचा दिखाना शुरू कर देते हैं । उनमें बहस होती है, झगड़े होते हैं तनाव होता है, आँसू बहाए जाते हैं । प्रेम का जादुई महल ताश के पत्तों की तरह ढेर हो जाता है और सारे आसमानी सपने मिट्टी में मिल जाते हैं ।

हम ख़ुद से पूछते हैं :

यह कैसे हुआ ?

यह क्यों हुआ ?

यह सबके साथ क्यों होता है ?

इन सवालों के बहुत से दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक जवाब दिए जा सकते हैं, फिर भी समस्या ज्यों की त्यों रहती है । प्रेम का हरा–भरा वृक्ष धीरे–सूख जाता है और मर जाता है । यह लगभग हर एक के साथ होता है ।

दुनिया में हर साल करोड़ों लोग प्यार करते हैं, शादी करते हैं और तलाक़ लेते हैं क्योंकि उनका प्यार कहीं ग़ुम हो गया । ऐसा अनुमान है कि जो लोग शादी करते हैं, उनमें से लगभग पचास प्रतिशत लोगों का तलाक़ हो जाता है और जो बाक़ी बचते हैं उनमें से भी पचास प्रतिशत लोग प्रेम के कारण इकट्ठे नहीं रहते, बल्कि वफ़ादारी, सामाजिक प्रतिष्ठा या एक बार फिर से शुरू करने के डर के कारण साथ–साथ रहते हैं ।

बहुत कम लोग पूरी ज़िंदगी वैवाहिक प्रेम का आनंद ले पाते हैं । परंतु ऐसा होता है, ऐसा हो सकता है । जब पुरुष और महिलाएँ अपनी भिन्नताओं को समझ लेते हैं, उनका सम्मान करते हैं तो प्रेम का गुलाब आपके आँगन में हमेशा के लिए खिल उठता है ।

प्रेम सचमुच जादुई अनुभव है, और यह हमेशा बना रह सकता है, परंतु तभी जब हमें अपनी भिन्नताओं का एहसास हो ।





अध्याय 2

श्रीमान “समस्या–सुलझाने– वाले” और श्रीमती “घर–सुधार समिति”


महिलाओं को सबसे ज़्यादा शिकायत इस बात से होती है कि पुरुष उनकी बात ठीक से सुनते ही नहीं हैं । जब भी पत्नी बोलती है तो या तो पति उसे पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर देता है या फिर वह कुछ देर ही सुनता है, इस बात का अंदाज़ लगाता है कि पत्नी की परेशानी क्या है और फिर गर्व से अपनी “समस्या–सुलझाने–वाली–टोपी” लगा लेता है और उसे उस समस्या का हल बता देता है । जब उसकी सलाह को महत्व नहीं मिलता, तो वह दुविधा में पड़ जाता है । पत्नी चाहती है हमदर्दी ; जबकि पति को लगता है कि वह अपनी समस्या का समाधान चाहती है ।

पुरुषों को महिलाओं से सबसे बड़ी शिकायत यह होती है कि वे हमेशा उन्हें सुधारने के चक्कर में पड़ी रहती हैं । जब कोई महिला प्रेम करती है तो वह चाहती है कि उसका पति अच्छे से अच्छा दिखे, अच्छे से अच्छा काम करे । इसलिए वह उसे सुधारकर बेहतर बनाना चाहती है । वह तत्काल घर – घर–सूधार समिति बना लेती है और पति को सुधारना उसका प्रमुख लक्ष्य बन जाता है । चाहे पति उसकी सलाह को कितना ही अस्वीकार करे, वह प्रयास करना नहीं छोड़ती – हर मौक़े पर वह उसकी मदद करना चाहती है या उसे बताती है कि उसे क्या करना चाहिए । पत्नी सोचती है कि वह उसकी मदद कर रही है, जबकि पति को लगता है कि उस पर नियंत्रण किया जा रहा है, उसकी स्वतंत्रता कम हो रही है । इसके बजाय पति चाहता है कि पत्नी उसे सुधारने के बजाय उसके वर्तमान स्वरूप में ही स्वीकार करे ।

इन दोनों समस्याओं को सुलझाया जा सकता है बशर्ते हम पहले यह समझ लें कि पुरुष समाधान क्यों सुझाते हैं और महिलाएँ क्यों सुधारना चाहती हैं । इसके लिए हमें एक बार फिर उसी दौर में जाना होगा, जब पुरुष मंगल ग्रह पर रहा करते थे और महिलाएँ शुक्र ग्रह पर ।

मंगल ग्रह पर जीवन

मंगल ग्रह के लोग शक्ति, योग्यता, कार्यकुशलता और उपलब्धि को महत्वपूर्ण मानते हैं । उनकी सफलता का पैमाना है परिणाम हासिल करना और सफल होना । उनकी पोशाक भी उनके इन्हीं गुणों या योग्यताओं को दर्शाती है । पुलिस अफ़सर, सिपाही, बिज़नेसमैन, वैज्ञानिक, टैक्सी ड्राइवर, तकनीशियन और कुक यूनिफ़ॉर्म या टोपी पहनते हैं ताकि उनकी योग्यता और शक्ति पहली नज़र में ही दिखाई दे जाए ।

वे साइकलॉजी टुडे, सेल्फ़ या पीपुल जैसी पत्रिकाएँ नहीं पढ़ते । वे तो आउटडोर गतिविधियों में ज़्यादा दिलचस्पी लेते हैं जैसे शिकार करना, फ़िशिंग और कार रेसिंग । वे समाचार, मौसम, और खेल में रुचि लेते हैं जबकि रोमांटिक उपन्यासों और आत्म – सुधार की पुस्तकों में उनकी कोई ख़ास रुचि नहीं होती ।

लोगों और भावनाओं के बजाय वे “वस्तुओं” और “चीज़ों” में ज़्यादा रुचि लेते हैं । आज भी धरती पर महिलाएँ रोमांस की कल्पना करती हैं, जबकि पुरुष सशक्त कारों, तेज़ कंप्यूटरों और नई-नई – चीज़ों की कल्पना करते हैं ।

लक्ष्य हासिल करना मंगल ग्रह के पुरुष के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उसकी योग्यता सिद्ध होती है और उसे सफल होने का एहसास होता है । उसे गर्व होता है क्योंकि उसने ख़ुद वह लक्ष्य हासिल किया है । मंगल ग्रह के लोग अकेले काम करना पसंद करते हैं क्योंकि स्वतंत्रता उनके लिए योग्यता, कार्यकुशलता और शक्ति का प्रतीक है ।

मंगल ग्रह के पुरुष के इस लक्षण को समझ लेने से महिलाओं को यह समझ में आ जाएगा कि पुरुष उनकी सुधारने की आदत से क्यों चिढ़ जाते हैं । किसी पुरुष को बिना माँगे सलाह देने का मतलब यह मानना है कि उसे काम करना नहीं अाता या वह उस काम को अपने आप नहीं कर सकता । इस बारे में पुरुष बहुत जल्दी बुरा मान जाते हैं क्योंकि उनके लिए कार्यकुशलता बहुत महत्चपूर्ण होती है ।

चूँकि वह अकेले ही अपने समस्याएँ सुलझाने में यक़ीन करता है, इसलिए मंगल ग्रह का पुरुष अपनी समस्याओं के बारे में बात नहीं करता, जब तक कि उसे विशेषज्ञ की सलाह की ज़रूरत न हो । उसका तर्क होता है, “किसी और को क्यों शामिल करूँ जब मैं इसे अपने आप सुलझा सकता हूँ ?” जब तक उसे समस्या का हल ढूँढ़ने के लिए किसी की मदद की ज़रूरत नहीं होती तब तक वह अपनी समस्या को अपने तक ही रखता है । जब आप किसी काम को अपने आप कर सकते हैं, तब किसी दूसरे से सलाह लेना मंगल ग्रह पर कमज़ोरी की निशानी समझा जाता है ।

परंतु, अगर उसे सचमुच मदद की ज़रूरत होती है, तो वह किसी समझदार व्यक्ति की सलाह लेता है । मंगल ग्रह पर समस्या के बारे में बात करने का मतलब है समाधान सुझाने का आमंत्रण । मंगल ग्रह का दूसरा पुरुष यह अवसर दिए जाने पर गर्व से भर जाता है । तत्काल वह अपनी “समस्या – सुलझाने – वाली – टोपी” लगा लेता है, कुछ देर समस्या सुनता है और फिर अपनी बेशक़ीमती सलाह दे देता है ।

मंगल ग्रह की इसी परंपरा के कारण जब महिलाएँ अपनी समस्याओं के बारे में बात करती हैं, तो पुरुष तत्काल समाधान सुझाने लगते हैं । जब कोई महिला अपने दिल का ग़ुबार निकालना चाहती है और सिर्फ़ अपनी भड़ास निकालना चाहती है, तो पुरुष ग़लती से यह समझ बैठता है कि वह अपनी समस्याओं का समाधान चाहती है । वह अपनी “समस्या - सुलझाने - वाली - टोपी” लगा लेता है और सलाह देने लगता है ; उसकी नज़र में यही वह तरीक़ा है जिससे वह उसकी मदद कर सकता है और अपने प्यार का इज़हार कर सकता है ।

वह महिला की समस्याएँ सुलझाकर उसका मूड ठीक करना चाहता है । वह उसकी मदद करना चाहता है । वह महसूस करता है कि अगर वह अपनी योग्यता से उसकी समस्याएँ सुलझा देगा, तो महिला की नज़रों में उसका महत्व बढ़ जाएगा ।

उसके समाधान सुझाने के बाद भी जब महिला अपनी समस्या का रोना रोती रहती है तो बेचारे पुरुष को यह समझ ही नहीं आता कि अब क्या परेशानी है । चूँकि महिला ने पुरुष के समाधान को अस्वीकार कर दिया है, इसलिए पुरुष को लगता है कि अब बात करने का कोई औचित्य ही नहीं है ।

पुरुष यह नहीं समझ पाता कि अगर वह हमदर्दी और दिलचस्पी से महिला की पूरी बात सुन ले, तो इतने से ही महिला का दुख कम हो जाता है । वह नहीं जानता कि शुक्र ग्रह पर समस्याओं के बारे में बात करने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें समाधान चाहिए ।

शुक्र ग्रह पर जीवन

शुक्र ग्रह की महिलाओं के जीवनमूल्य भिन्न हैं । वे प्रेम, संप्रेषण, संदरता और रिश्तों को महत्व देती हैं । वे एक – दूसरे को सहारा देने, एक – दूसरे की मदद करने और सहयोग करने में काफ़ी समय देती हैं । वे दुख - दर्द बाँटने में यक़ीन करती हैं ।

शुक्र ग्रह की महिलाएँ ऊँची–ऊँची इमारतें या मशीनें बनाने के बजाय सद्भाव, सहयोग और प्रेम की इमारतें बनाने में यक़ीन करती हैं । उनके लिए काम से महत्वपूर्ण हैं संबंध । कई मायनों में उनकी दुनिया मंगल ग्रह की दुनिया के बिलकुल विपरीत है।

वे मंगल ग्रह के निवासियों की तरह अपनी योग्यता दिखाने वाली यूनिफ़ॉर्म नहीं पहनतीं । इसके बजाय वे हर दिन अपने मूड के हिसाब से अलग–अलग कपड़े पहनना पसंद करती हैं । व्यक्तिगत अभिव्यक्ति, ख़ासकर भावनाओं की अभिव्यक्ति उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है । वे अपने बदलते मूड के हिसाब से एक दिन में कई बार ड्रेस बदल सकती हैं।

लक्ष्य हासिल करने के बजाय महिलाओं का प्रमुख उद्देश्य संबंध बनाना होता है । शुक्र ग्रह पर हर महिला मनोविज्ञान की विशेषज्ञ होती है । महिलाओं की छठी इन्द्रिय बहुत सक्रिय और सटीक होती है । सदियों तक दूसरों की ज़रूरतों को समझने के कारण ही उनमें यह योग्यता विकसित हो सकी है । शुक्र ग्रह पर बिना माँगे सलाह देना या मदद करना प्रेम की निशानी समझा जाता है ।

चूँकि शुक्र ग्रह की महिलाओं के लिए अपनी सक्षमता सिद्ध करना महत्वपूर्ण नहीं है, इसलिए मदद देना अपमानजनक नहीं लगता और मदद लेना कमज़ोरी की निशानी नहीं समझा जाता। परंतु पुरुष चूँकि मंगल ग्रह से आए हैं, इसलिए जब कोई महिला उन्हें सलाह देती है तो वे इसे अपना अपमान समझते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि महिला उन्हें अक्षम मान रही है ।

महिला को पुरुष की इस संवेदनशीलता का कोई अंदाज़ा नहीं होता क्योंकि यदि कोई उसकी इस तरह मदद करे, तो उसे बहुत अच्छा लगेगा । इससे उसे प्रेम का एहसास होगा, ऐसा लगेगा जैसे कोई उसका ख़्याल रख रहा है । परंतु किसी पुरुष को बिना माँगी सलाह या मदद देने से उसे ऐसा लग सकता है जैसे उसे अयोग्य या कमज़ोर समझा जा रहा है या उस पर अविश्वास किया जा रहा है ।

शुक्र ग्रह पर सलाह देना या सुझाव देना प्रेम की निशानी समझा जाता है । शुक्र ग्रह की महिलाएँ मानती हैं कि हर काम बेहतर तरीक़े से हो सकता है, हर चीज़ में सुधार की गुंजाइश है । जब महिलाएँ किसी की चिंता करती हैं तो वे खुलकर बताती हैं कि सुधार की गुंजाइश कहाँ – कहाँ है और किन –किन बातों या चीज़ों को सुधारा जा सकता है । शुक्र ग्रह की महिलाओं के लिए सलाह देना और रचनात्मक आलोचना प्रेम के परिचायक हैं ।

मंगल ग्रह की दुनिया बिलकुल अलग है । वे लोग समाधान को महत्व देते हैं । अगर कोई चीज़ काम कर रही है, तो उनका मानना है कि उसे बिलकुल मत बदलो । वे कहते हैं, जब तक कोई चीज़ काम कर रही है, तब तक उसे बिलकुल मत छेड़ो ।

जब कोई महिला किसी पुरुष को सुधारने की कोशिश करती है, तो पुरुष को लगता है कि महिला की नज़र में वह बिगड़ा हुआ है, निकम्मा है, नाकारा है, अयोग्य है तभी यह महिला उसे सुधारना चाहती है । महिला को यह पता नहीं होता कि उसके प्रेमपूर्ण सुझाव पुरुष को इतने अपमानजनक और आपत्तिपूर्ण क्यों लगते हैं । वह ग़लत समझ बैठी थी कि अगर वह उसे बेहतर बनाने की कोशिश करेगी तो पुरुष उसकी इस पहल का स्वागत करेगा ।

सलाह देना छोड़ दें

पुरुषों के स्वभाव को जाने बिना यह बहुत आसान है कि कोई भी महिला अनजाने में ही अपने प्रिय पुरुष का दिल दुखा दे । आम तौर पर जब महिला बिना माँगे सलाह देती है या पुरुष की मदद करने की कोशिश करती है, तो उसे इस बात का एहसास ही नहीं होता कि पुरुष की नज़र में वह कितनी आलोचनात्मक या प्रेमहीन लग रही है । हालाँकि महिला प्रेम जताना चाहती है, परंतु उसके सुझावों से पुरुष को भावनात्मक चोट पहुँचती है । मंगल ग्रह पर रहने वाले अपने पूर्वजों की तरह इस दुनिया के पुरुष भी विशेषज्ञ बनने में गर्व का अनुभव करते हैं, ख़ासकर मशीनों को सुधारने में, यात्रा करने में और समस्याएँ सुलझाने में हैं, ऐसे समय में उन्हें महिलाओं की प्रेमपूर्ण स्वीकृति की आवश्यकता होती है, उनकी सलाह या आलोचना की नहीं ।

सुनना सीखना

इसी तरह, अगर पुरुष यह न समझे कि महिलाओं का स्वभाव भिन्न होता है, तो वह भी मदद करने की कोशिश में अपने रिश्ते बिगाड़ लेगा । पुरुषों को ध्यान रखना चाहिए कि जब महिलाएँ समस्याओं के बारे में बात करती हैं तो वे समाधान खोजने के लिए ऐसा नहीं करती हैं, बल्कि अपने आपको हल्का करने के लिए और रिश्तों में नज़दीकी बढ़ाने के लिए ऐसा करती हैं ।

महिला कई बार बताना चाहती है कि दिन में उसके साथ क्या हुआ, परंतु उसका पति हर बार उसकी मदद करने के प्रयास में उसकी बात बीच में ही काट देता है और उसकी समस्याओं के समाधान सुझाने लगता है । वह यह नहीं समझ पाता कि पत्नी उसके समाधान सुनकर ख़ुश क्यों नहीं हुई ।

संक्षेप में महिला - पुरुष संबंधों में दो सबसे आम गलतियाँ यह होती हैं :

1. जब कोई महिला परेशान दिखती है, तो पुरुष तत्काल श्रीमान “समस्या - सुलझाने - वाला” बनकर उसके मूड को बदलने की कोशिश करता है और उसकी समस्याओं के समाधान सुझाकर यह साबित करता है कि वह बेकार में इतनी चिंता कर रही है ।

2. जब पुरुष कोई ग़लती करता है, तो महिला तत्काल श्रीमती “घर - सुधार समिति” बनकर उसके व्यवहार को बदलने की कोशिश करती है और बिन माँगी सलाह देती है या उसकी आलोचना करती है ।

महिलाओं को पुरुषों की कौन सी बातें पसंद नहीं आतीं ?

पुरुष को यह समझना चाहिए कि महिलाएँ दूसरे ग्रह से आई हैं और इसलिए जब वे समस्याओं के बारे में बात करती हैं तो उन्हें समाधान नहीं, बल्कि हमदर्दी चाहिए । नीचे कुछ वाक्य दिए गए हैं, जिन्हें पुरुष अक्सर बोलते हैं और जिन्हें महिलाएँ नापसंद करती हैं ।

1. तुम्हें इतनी चिंता नहीं करनी चाहिए ।

2. परंतु मैंने ऐसा तो नहीं कहा था ।

3. यह कोई इतनी बड़ी बात नहीं है ।

4. ओके, आई एम सॉरी । अब भूल भी जाओ ।

5. तुम इस काम को कर क्यों नहीं देतीं ?

6. परंतु हम बातें तो करते हैं ।

7. तुम्हें चोट क्यों पहुँची, मेरे कहने का यह मतलब नहीं था ।

8. तो तुम कहना क्या चाहती हो ?

9. परंतु तुम्हें इस तरह नहीं सोचना चाहिए ।

10. तुम ऐसा कैसे कह सकती हो ? अभी पिछले हफ़्ते ही तो मैंने तुम्हारे साथ पूरा दिन गुज़ारा था । हमें कितना मज़ा आया था ।

11. ओके, तो अब बात को यहीं पर ख़त्म कर दें ।

12. अच्छा बाबा, मैं आँगन साफ़ कर दूँगा । अब तो ख़ुश ?

13. मैं समझ गया । तुम्हें यह करना चाहिए. . .

14. देखो, हम इस बारे में कुछ नहीं कर सकते ।

15. अगर तुम्हें यह करना अच्छा नहीं लगता, तो फिर इसे मत करो ।

16. तुम अपने साथ लोगों को ऐसा बर्ताव क्यों करने देती हो ? उन्हें भूल जाओ ।

17. अगर तुम ख़ुश नहीं हो, तो हमें तलाक़ ले लेना चाहिए ।

18. अच्छा, अब आगे से यह काम तुम ही करना ।

19. आज के बाद मैं इस काम को करूँगा ।

20. सवाल ही नहीं उठता । मैं तुमसे प्रेम करता हूँ । तुम भी कैसी मूर्खतापूर्ण बात कर रही हो ?

21. क्या तुम सीधे मुद्दे की बात पर आओगी ?

22. हमें बस यही करना है कि. . .

23. जो हुआ वह यह नहीं था ।

इनमें से हर वाक्य महिला की तनाव की भावनाओं को कम करने का प्रयास किया गया है या फिर समाधान सुझाने का । पुरुष महिला की नकारात्मक भावनाओं को सकारात्मक भावनाओं में बदलने की कोशिश करते हैं । इसीलिए वे समस्याओं की गंभीरता को कम करके बताते हैं या समस्या को छोटा बताते हैं, ताकि महिला की चिंता दूर हो सके । पुरुष के इरादे नेक होते हैं । वे महिला का मूड ठीक करना चाहते हैं । परंतु बेहतर यही होगा कि पुरुष ऊपर दिए हुए वाक्यों को बोलना छोड़ दें । इस तरह के वाक्यों से पत्नी का मूड और ख़राब होता है ।

पुरुषों को महिलाओं की कौन सी बातें पसंद नहीं आतीं ?

महिलाओं को यह याद रखना चाहिए कि पुरुष दूसरे ग्रह से आए हैं, इसलिए उनका सोचने का तरीक़ा अलग है । बिन माँगी सलाह देने से या हानिरहित आलोचना से कोई भी पत्नी अनजाने में ही अपने पति का दिल दुखा सकती है और उसके स्वाभिमान को गहरी चोट पहुँचा सकती है । नीचे कुछ वाक्य दिए गए हैं जिन्हें सुनकर पुरुष को ठेस पहुँचती है और उसे ऐसा लगता है जैसे उसकी ज़िंदगी पर नियंत्रण करने की कोशिश हो रही है, उसकी आलोचना हो रही है या उसे सुधारने का प्रयास किया जा रहा है ।

1. तुमने इसे ख़रीदने की बात सोच कैसे ली ? तुम्हारे पास पहले से ही ऐसी शर्ट है ।

2. बर्तन अभी गीले हैं । जब वे सूखेंगे तो उनमें धब्बे बड़ जाएँगे ।

3. तुम्हारे बाल बढ़ रहे हैं, इन्हें कब कटवाओगे ?

4. वहाँ पर कार खड़ी करने की जगह है, कार को उसी तरफ़ मोड़ लो ।

5. तुम अपने दोस्तों के साथ समय गुज़ारना चाहते हो ? और मेरा क्या होगा ?

6. तुम्हें इतना ज़्यादा काम नहीं करना चाहिए । एकाध दिन की छुट्टी ले लो ।

7. इस चीज़ को यहाँ मत रखो । यह ग़ुम जाएगी ।

8. तुम्हें प्लंबर को बुला लेना चाहिए । वह जानता होगा कि इसे कैसे ठीक किया जाता है ।

9. हम टेबल ख़ाली होने का इंतज़ार क्यों कर रहे हैं ? क्या तुमने रिज़र्वेशन नहीं करवाया था ?

10. तुम्हें बच्चों के साथ ज़्यादा समय बिताना चाहिए । उन्हें तुम्हारी कमी अखरती है ।

11. तुम्हारे ऑफ़िस का बुरा हाल है । तुम यहाँ बैठकर सोच कैसे सकते हो ? तुम इसकी सफ़ाई कब करने वाले हो ?

12. तुम एक बार फिर वह चीज़ लाना भूल गए । अगली बार तुम लिस्ट बनाकर ले जाना, तब तुम्हें याद रह पाएगी ।

13. तुम बहुत तेज़ गाड़ी चला रहे हो । धीमे चलो वरना तुम पर जुर्माना हो जाएगा ।

14. अगली बार हमें फ़िल्मों के रिव्यू पढ़ने चाहिए ।

15. मुझे पता नहीं था कि तुम कहाँ हो । ( तुम्हें कम से कम फ़ोन तो करना चाहिए था ? )

16. किसी ने जूस की बोतल से जूस पी लिया ।

17. अपनी ऊँगलियों से मत खाओ । देखने वाला तुम्हें फूहड़ समझेगा ।

18. पोटेटो चिप्स में बहुत ऑइल है । यह तुम्हारे हार्ट के लिए ठीक नहीं हैं।

19. तुम्हारे पास ज़्यादा समय नहीं रहेगा ।

20. तुम्हें थोड़ा पहले बताना चाहिए था । अब मैं अपना सारा काम छोड़कर तुम्हारे साथ लंच पर तो नहीं चल सकती ।

21. तुम्हारी शर्ट तुम्हारे पैंट से मैच नहीं कर रही है ।

22. बिल ने तीसरी बार फ़ोन किया था । तुम उससे बात कब करोगे ?

23. तुम्हारे टूलबॉक्स में बहुत सा अटाला पड़ा हुआ है । मुझे इसमें कोई चीज़ नहीं मिल रही है । तुम इसे कब साफ़ करोगे ?

अगर आप महिला हैं तो मैं आपको यही सुझाव दूंगा कि आप अगले सप्ताह अपने पति को किसी क़िस्म की बिना माँगी सलाह न दें, उसकी किसी तरह की आलोचना न करें । इससे न सिर्फ़ उसका मूड अच्छा रहेगा, बल्कि वह आपका मूड भी अच्छा रखेगा ।

अगर आप पुरुष हैं, तो मैं आपको यह सुझाव देना चाहता हूँ कि आप अगले सप्ताह यह करें । जब भी पत्नी बोले तो उसकी भावनाओं को समझने के लिए उसकी पूरी बात सुनें । जब भी आपके दिल में समाधान सुझाने का ख़्याल आए तो अपनी जीभ को दाँतों तले दबा लें । पत्नी के नकारात्मक मूड को सकारात्मक बनाने की कोशिश भी न करें । अगर आप हमदर्दी से, रुचि लेकर उसके दिल की बात सुनेंगे, तो उसका मूड अपने आप ठीक हो जाएगा और वह आपको और ज़्यादा प्रेम करने लगेगी ।





अध्याय 3

पुरुष अपनी गुफा में चले जाते हैं

और महिलाएँ बोलती बहुत हैं


पुरुषों और महिलाओं के बीच शायद सबसे बड़ा अंतर यह है कि वे अपने तनाव का अलग Ȑ अलग तरह से सामना करते हैं । पुरुष अपना पूरा ध्यान समस्या पर लगा लेता है और बाक़ी दुनिया से अपने को काट लेता है, जबकि महिलाएँ अपने कष्टों को सबके साथ बाँटना चाहती हैं । पुरुष को अकेले में समस्या सुलझाना अच्छा लगता है, महिला को समस्या के बारे में सबसे बातें करना । दोनों की इस मूलभूत भिन्नता को समझे बिना आपसी संबंधों में अनावश्यक तनाव पैदा हो सकता है ।

एक आम उदाहरण को लें :

जब टॉम घर आता है, तो वह आराम करना चाहता है इसलिए वह शांति से बैठकर अख़बार पढ़ता है । दिन भर की अनसुलझी समस्याओं के कारण वह तनाव में है ।

और वह उन्हें भूलकर तनावमुक्त होना चाहता है । उसकी पत्नी मैरी भी तनावपूर्ण दिन के बाद आराम करना चाहती है । परंतु उसके आराम करने का तरीक़ा है दिन भर की समस्याओं के बारे में बातें करना । दोनों की इसी भिन्नता के कारण उनमें तनाव धीरे Ȑ धीरे इतना बढ़ जाता है कि विद्वेष में बदल जाता है ।

टॉम मन में सोचता है कि मैरी बहुत ज़्यादा बोलती है, जबकि मैरी को लगता है कि टॉम उसकी तरफ़ ध्यान नहीं दे रहा है । अपनी भिन्नताओं को समझे बिना वे और ज़्यादा दूर होते जाएँगे ।

आप शायद इस स्थिति से गुज़र चुके होंगे, क्योंकि यह महिला Ȑ पुरुष संबंधों की मूलभूत स्थिति है । यह अकेले टॉम और मैरी की समस्या नहीं है, बल्कि यह तो दुनिया के हर पति Ȑ पत्नी की समस्या है।

इस समस्या को सुलझाने के लिए हमें अपोज़िट सेक्स को समझना ज़रूरी है । यह जाने बिना कि महिलाएँ राहत पाने के लिए ज़्यादा बोलती हैं, टॉम सोचता रहेगा कि मैरी बहुत ज़्यादा बोलती है और वह उसकी बात को अनसुना कर देगा । यह समझे बिना कि टॉम अख़बार इसलिए पढ़ रहा है ताकि उसे राहत मिल सके, मैरी को यह लगता रहेगा कि टॉम उसे नज़रअंदाज़ या उपेक्षित कर रहा है । वह लगातार कोशिश करती रहेगी कि टॉम उससे बातें करे, जबकि टॉम ऐसा करने के मूड में नहीं है ।

बेहतर होगा कि हम यह देखें कि मंगल और शुक्र ग्रहों पर तनाव का सामना कैसे किया जाता था ।

मंगल और शुक्र ग्रहों पर

तनाव का सामना कैसे किया जाता था

जब मंगल ग्रह का पुरुष तनावग्रस्त होता है, तो वह अपनी समस्या के बारे में कभी बात नहीं करता । वह मंगल ग्रह के दूसरे निवासी पर अपनी समस्या का बोझ नहीं डालता, जब तक कि उसके मित्र की मदद समस्या सुलझाने के लिए ज़रूरी न हो । इसके बजाय वह बहुत चुप हो जाता है और अपनी समस्या के बारे में विचार करने के लिए अपनी गुफा में चला जाता है, और समाधान खोजने का प्रयास करता है । जब उसे समाधान मिल जाता है, तो उसे अच्छा लगता है और वह अपनी गुफा से ख़ुशी Ȑ ख़ुशी बाहर निकल आता है ।

अगर उसे समाधान नहीं मिलता, तो वह ऐसा कोई काम करता है जिससे वह अपनी समस्या को भूल जाए जैसे अख़बार पढ़ना या कोई गेम खेलना । दिन भर की समस्याओं से अपना ध्यान हटाने के लिए वह ऐसा करता है और धीरे Ȑ धीरे रिलैक्स हो जाता है । अगर तनाव बहुत ज़्यादा है, तो वह कोई ज़्यादा चुनौतीपूर्ण काम करता है जैसे कार रेसिंग, प्रतियोगिता में हिस्सा लेना या पहाड़ चढ़ना ।

जब शुक्र ग्रह की महिला तनाव में होती है, तो राहत पाने के लिए वह किसी विश्वासपात्र व्यक्ति को ढूँढ़ती है जिसके सामने वह दिन भर की समस्याओं के बारे में विस्तार से बातें कर सके । जब शुक्र ग्रह की महिलाएँ अपनी परेशानी विस्तार से सुनाती हैं, तो इसके बाद उनका मूड पहले से बेहतर हो जाता है । तनाव से निबटने का यह शुक्र ग्रह का तरीक़ा है ।

मंगल ग्रह के पुरुष का मूड तब अच्छा होता है जब वह अकेला अपनी समस्याओं को अपनी गुफा में सुलझा लेता है । शुक्र ग्रह की महिला का मूड तब अच्छा होता है जब वह किसी हमदर्द के सामने अपनी समस्याओं को विस्तार से सुनाती है ।

गुफा में राहत पाना

जब कोई आदमी तनावग्रस्त होता है तो वह अपने दिमाग की गुफा में है और समस्या सुलझाने पर पूरा ध्यान लगाता है । चला जाता वह एक ही समस्या पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर लेता है और उसे बाक़ी चीज़ों की सुधबुध ही नहीं रहती । बाक़ी समस्याएँ या ज़िम्मेदारियाँ पृष्ठभूमि में चली जाती हैं ।

ऐसे वक़्त वह भुलक्कड़, लापरवाह और अनमना नज़र आता है । उदाहरण के तौर पर, घर पर चर्चा करते समय ऐसा लगेगा कि उसके दिमाग़ का केवल 5 प्रतिशत हिस्सा ही बात कर रहा हो और बाक़ी 95 प्रतिशत हिस्सा अभी भी समस्या सुलझाने के तरीक़े पर विचार कर रहा हो । ऐसे समय वह अपनी पत्नी की तरफ़ उतना ज़्यादा ध्यान नहीं दे पाता, जिसकी वह हक़दार । हैं उसके दिमाग़ पर बहुत बड़ा बोझ होता है जिससे वह छुटकारा नहीं पा सकता । परंतु अगर उसे समस्या का समाधान मिल जाए, तो उसका बोझ अपने आप हल्का हो जाएगा और वह अपनी गुफा से बाहर निकलकर सामान्य जीवन जी सकेगा ।

परंतु अगर वह अपनी समस्या का समाधान नहीं ढूँढ़ पाता, तो वह अपनी गुफा में ही फँसा रहेगा । अपनी गुफा से कुछ समय के लिए बाहर आने के लिए वह छोटी Ȑ छोटी समस्याओं में अपना दिमाग़ लगाएगा, जैसे अख़बार पढ़ना, टीवी देखना, कार ड्राइव करना, शारीरिक एक्सरसाइज़ करना, फ़ुटबॉल गेम देखना, बास्केटबॉल खेलना इत्यादि । ऐसा कोई भी चुनौतीपूर्ण काम उसे राहत देगा, जिसमें उसके केवल 5 प्रतिशत दिमाग़ की ज़रूरत हो, क्योंकि इससे उसे अपनी समस्याओं को भूलने में मदद मिलती है । अगले दिन वह अपनी समस्या पर नए सिरे से ज़्यादा अच्छी तरह से सोच सकता है ।

कुछ उदाहरण लें । जिम अपनी समस्याओं को भूलने के लिए आम तौर पर अख़बार पढ़ता है । जब वह अख़बार पढ़ता है, तो वह दिन भर की समस्याओं से अपने आपको काट लेता है । अपने 5 प्रतिशत दिमाग से, जो उसकी समस्या को सुलझाने में नहीं लगा है, वह दुनिया भर की समस्याओं के बारे में विचार करता है और उनके समाधान सोचता है । धीरे Ȑ धीरे वह अख़बार की समस्याओं में ज़्यादा रुचि लेने लगता है ( जिनके लिए वह ज़िम्मेदार नहीं है ) और अपनी समस्या को भूल जाता है । इस तरह से वह एक बार फिर नॉर्मल हो जाता है और अपनी पत्नी की तरफ़ पूरा ध्यान दे सकता है ।

टॉम अपने तनाव को कम करने के लिए फ़ुटबॉल गेम देखता है । वह अपनी फेवरिट टीम की समस्याओं को सुलझाकर अपनी समस्याओं से राहत पाता है । जब भी उसकी टीम जीतती है, तो उसे सफलता का अनुभव होता है । जब उसकी टीम हारती है तो उसे ऐसा लगता है जैसे वह हार गया । दोनों ही प्रकरणों में, उसका दिमाग़ उसकी असली समस्याओं के जाल से बाहर निकल आता है ।

गुफा के बारे में महिलाओं की

प्रतिक्रिया क्या होती है

जब कोई पुरुष गुफा में चला जाता है, तो अपनी स्वभावगत मजबूरी के कारण वह अपने जीवनसाथी की तरफ़ उतना ध्यान नहीं दे पाता जितना उसे देना चाहिए । ऐसे समय महिला बहुत परेशान हो जाती है क्योंकि वह जानती ही नहीं है कि उसका पति कितने तनाव में है । अगर वह घर आकर अपनी समस्याओं के बारे में बात करे, तो वह ज़्यादा सहानुभूति दिखा सकती है । इसके बजाय वह अपनी समस्याओं के बारे में बिलकुल बातें नहीं करता और पत्नी को लगता है कि वह उसकी उपेक्षा कर रहा है । वह इतना तो समझ लेती है कि वह परेशान है परंतु वह ग़लत अनुमान लगा लेती है कि वह चूँकि उसे कुछ बता नहीं रहा है इसलिए वह उसे नज़रअंदाज़ कर रहा है ।

आम तौर पर महिलाएँ यह नहीं जानतीं कि मंगल ग्रह के पुरुष तनाव का मुक़ाबला किस तरह करते हैं । महिलाएँ उम्मीद करती हैं कि पुरुष खुलकर अपनी समस्याओं के बारे में विस्तार से बात करें, जैसा शुक्र ग्रह की महिलाएँ करती हैं । जब कोई आदमी अपनी गुफा में घुस जाता है, तो महिला को चिढ़ छूटती है कि वह अपना दुख उसके साथ बाँट नहीं रहा है । जब उसका पति उसकी उपेक्षा करके अख़बार पढ़ने लगता है या टीवी देखने लगता है या बाहर जाकर बास्केटबॉल या कोई और खेल खेलने लगता है तो उसे चोट पहुँचती है ।

गुफा में जाने वाले आदमी से यह उम्मीद करना बेकार है कि वह खुलकर विस्तार से अपनी समस्या बताएगा या पत्नी पर पूरा ध्यान देगा या उसे पूरी तरह प्रेम करेगा । यह उसी तरह है जैसे किसी तनावग्रस्त महिला से यह उम्मीद करना बेकार है कि वह तत्काल शांत हो जाएगी और समझदारी से तार्किक ढँग से बातें करेगी । जब मंगल ग्रह के लोग अपनी गुफाओं में जाते हैं, तो वे भूल जाते हैं कि उनके दोस्तों के पास भी समस्याएँ हैं । उनमें यह भावना आ जाती है कि किसी और का ध्यान रखने के पहले आदमी को अपना ध्यान रखना चाहिए । जब पत्नी पति को इस तरह का व्यवहार करते देखती है, तो स्वाभाविक रूप से वह इसका विरोध करती है और इससे चिढ़ जाती है ।

लड़ने Ȑ झगड़ने या बहस करने के बजाय शुक्र ग्रह की महिलाओं को यह समझना चाहिए कि गुफा में जाना मंगल ग्रह के पुरुषों का शौक़ नहीं, बल्कि उनकी आदत है । तनाव दूर करने का, समस्या सुलझाने का यह उनका सदियों पुराना तरीक़ा है । इसलिए अगर पति गुफा में चला गया हो, तो परेशान होने के बजाय आप अपने पति को सहयोग दें ।

दूसरी तरफ़, पुरुषों को आम तौर पर यह एहसास नहीं होता कि जब वे अपनी गुफा में चले जाते हैं तो वे अपने क़रीबी लोगों से कितने दूर हो जाते हैं । अगर पति यह समझ ले कि उसके गुफा में जाने से पत्नी उपेक्षित और महत्वहीन महसूस करती है, तो वह उसके प्रति ज़्यादा हमदर्दी रखेगा । चूँकि पुरुष महिलाओं की बात का असली मतलब नहीं समझ पाते, इसलिए वे आम तौर पर ख़ुद को बचाने में ही लगे रहते हैं और फ़ालतू की बहस करते हैं । ऐसे समय में पति Ȑ पत्नी के बीच यह पाँच ग़लतफ़हमियाँ होती हैं :

1. जब वह कहती है, “तुम तो सुनते ही नहीं हो ?”, तब पति कहता है, “तुम्हारा क्या मतलब है मैं नहीं सुन रहा हूँ । मैं तुम्हारी कही बात का एक Ȑ एक शब्द दोहरा सकता हूँ ।”

जब कोई पुरुष गुफा में होता है तो वह अपने 5 प्रतिशत दिमाग़ से महिला की बात सुन सकता है और याद रख सकता है । पुरुष तर्क देता है कि अगर वह 5 प्रतिशत दिमाग़ से भी उसकी बात सुन रहा है, तो महिला परेशान क्यों है । वह यह नहीं समझ पाता कि महिला उसका पूरा ध्यान चाहती है ।

2. जब पत्नी कहती है, “मुझे ऐसा लगता है जैसे तुम यहाँ नहीं, कहीं और हो ?”, तो पति का जवाब होता है, “तुम्हारा क्या मतलब है कि मैं यहाँ नहीं हूँ ? मैं यहीं हूँ । क्या तुम्हें मेरा शरीर दिखाई नहीं देता ?”

पुरुष का तर्क होता है कि अगर उसका शरीर उपस्थित है, तो महिला को यह नहीं कहना चाहिए कि वह कहीं और है । पत्नी यह कहना चाहती है कि हालाँकि उसका शरीर तो वहाँ है, परंतु उसका दिमाग़ कहीं और उलझा हुआ है इसलिए पत्नी को उसकी पूर्ण उपस्थिति का आभास नहीं हो रहा है ।

3. जब पत्नी कहती है, “तुम्हें मेरी कोई चिंता नहीं है,” तो पति जवाब देता है, “चिंता कैसे नहीं है ? तुम क्या सोचती हो मैं इस समस्या को सुलझाने की कोशिश क्यों कर रहा हूँ ?”

वह तर्क देता है कि चूँकि समस्या सुलझाने से पत्नी को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुँचेगा, इसलिए पत्नी को समझना चाहिए कि पति को उसकी फ़िक्र है । बहरहाल, पत्नी चाहती है कि पति उसका पूरा ध्यान रखे, उसकी चिंता करे, उसका हालचाल पूछता रहे और इस वाक्य के माध्यम से वह यही कहना चाहती है ।

4. जब पत्नी कहती है, “मुझे लगता है मैं तुम्हारे लिए महत्वपूर्ण नहीं हूँ ।”, तो पति जवाब देता है, “बेवकूफ़ी की बात मत करो । तुम मेरे लिए महत्वपूर्ण हो ।”

वह तर्क देता है कि चूँकि वह समस्या को उसके फ़ायदे के लिए सुलझा रहा है, इसलिए इस तरह के आरोप लगाना बेवकूफ़ी है । वह यह नहीं समझ पाता कि चूँकि उसका पूरा ध्यान सिर्फ़ एक समस्या को हल करने पर लगा हुआ है, इसलिए वह अपनी पत्नी की उन समस्याओं को अनदेखा कर रहा है जिनकी वजह से पत्नी परेशान है ।

5. जब वह कहती है, “तुममें तो दिल है ही नहीं । तुममें तो सिर्फ़ दिमाग़ है ।” तो पति कहता है, “इसमें ग़लत ही क्या है ? मैं इस समस्या को और कैसे सुलझा सकता हूँ ? ”

पति तर्क देता है कि पत्नी प्रोत्साहन देने के बजाय उसकी आलोचना कर रही है । उसे लगता है कि पत्नी उसे महत्व नहीं दे रही है । इसके अलावा वह अपनी पत्नी की भावनाओं को नहीं समझ पाता कि उसके गुफा में जाने से पत्नी अपने आपको कितना अकेला और असहाय महसूस कर रही थी ।

जब आदमी गुफा में जाए तो पत्नी को यह समझना चाहिए कि गुफा में जाना और कम बोलना उसके पति की आदत भी है । और अधिकार भी । इसी तरह, गुफा में जाने पर जब पत्नी उपेक्षित होने की शिकायत करे, तो पति को यह समझना चाहिए कि पत्नी को शिकायत करने और अपनी समस्याओं के बारे में विस्तार से बोलने की आदत भी है और अधिकार भी ।

बोलने से राहत पाना

जब कोई महिला तनाव में होती है, तो उसकी इच्छा होती है कि वह किसी क़रीबी व्यक्ति को अपनी समस्याएँ बताए, अपने दुख बाँटे और अपनी भावनाएँ खुलकर बयान करे । जब वह बोलना शुरू करती है, तो अपनी समस्याओं को महत्व के क्रम में नहीं बोलती । जब वह परेशान होती है, तो छोटी – बड़ी हर समस्या को लेकर परेशान होती है । वह अपनी समस्याओं का समाधान नहीं खोजना चाहती, बल्कि उनके बारे में अपनी भावनाओं को दिल से निकालकर राहत पाना चाहती है । अपनी समस्याओं के बारे में बिना क्रम के बात करने से उसका तनाव कम हो जाता है ।

जब कोई पुरुष तनाव में होता है तो वह केवल एक ही समस्या पर अपना ध्यान केंद्रित करता है और बाक़ी समस्याओं को भूल जाता है, परंतु जब कोई महिला तनाव में होती है तो वह अपनी समस्याओं को फैला लेती है । महिलाएँ अतीत की समस्याओं, वर्तमान की समस्याओं और भविष्य की समस्याओं के अलावा ऐसी समस्याओं के बारे में भी बात करती हैं जो हल हो ही नहीं सकतीं । केवल बोलने भर से वे बेहतर महसूस करने लगती हैं और उनका मूड ठीक हो जाता है । महिलाओं का तनाव से मुक़ाबला करने का सिस्टम यही है ।

जब कोई महिला परेशान होती है तो वह अपनी सारी समस्याओं के बारे में विस्तार से बातें करके राहत पाती है । अगर उसे लगता है कि उसकी बात को सुना और समझा जा रहा है, तो धीरे – धीरे उसका तनाव और उसकी परेशानी कम होने लगते हैं । एक – एक करके वह अपनी सारी कुंठाओं, समस्याओं, चिंताओं, निराशाओं के बारे में विस्तार से बताएगी और इनका कोई तार्किक क्रम नहीं होगा । अगर सामने वाला उसकी बात रुचि लेकर सुन रहा हो, तो महिला का मूड ठीक हो जाएगा । परंतु अगर सामने वाला ध्यान से नहीं सुन रहा हो या उसकी बात नहीं समझ रहा हो, तो महिला का मूड उखड़ जाएगा और वह पहले से भी ज़्यादा तनाव में आ जाएगी ।

जब महिलाएँ बोलती हैं

तो पुरुषों की प्रतिक्रिया क्या होती है

जब महिलाएँ समस्याओं के बारे में बात करती हैं, तो आम तौर पर पुरुष उनका विरोध करते हैं । पुरुष को लगता है कि महिला उसके सामने अपनी समस्याओं का रोना इसलिए रो रही है क्योंकि उसकी नज़र में पुरुष ही उन समस्याओं के लिए ज़िम्मेदार है । जितनी ज़्यादा समस्याएँ सुनाई जाएँगी, उसे लगेगा कि उसे उतना ही दोषी और ज़िम्मेदार समझा जा रहा है । पति को यह एहसास ही नहीं होता कि पत्नी उसे दोष नहीं दे रही है, बल्कि अपने मानसिक संतुलन को ठीक करने के लिए अपनी समस्याओं को दिल से निकाल रही है । पति को यह बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिए कि अगर वह रुचि लेकर उसकी पूरी बात सिर्फ़ सुन ले तो इतने से ही पत्नी का मूड ठीक हो जाएगा ।

मंगल ग्रह के पुरुष केवल दो कारणों से अपनी समस्याओं के बारे में बात करते हैं : या तो वे किसी को दोष देते हैं या फिर वे उससे सलाह माँगते हैं ।

अगर कोई महिला सचमुच परेशान है तो आदमी को लगता है कि वह उसे दोष दे रही है । अगर वह कम परेशान लग रही हो, तो उसे लगता है कि वह उससे समस्या का हल चाहती है ।

अगर उसे लगता है कि वह समस्या का हल चाह रही है, तो वह अपनी श्रीमान “समस्या – सुलझाने – वाली” टोपी पहनकर उसकी समस्याएँ सुलझाने में जुट जाता है । अगर पुरुष को लगता है कि महिला उसे दोष दे रही है तो वह आक्रमण से बचने के लिए और ख़ुद की रक्षा करने के लिए अपनी तलवार निकाल लेता है । दोनों ही मामलों में उसके लिए सुनना कठिन होता है ।

अगर वह उसकी समस्याओं के समाधान सुझाता है, तो भी वह दूसरी समस्याओं के बारे में बात करने लगती है । दो या तीन समाधान दे देने के बाद भी जब पत्नी उसे धन्यवाद नहीं देती तो उसे लगता है जैसे उसके समाधानों को ठुकरा दिया गया है और उसकी पत्नी की नज़रों में उसकी कोई क़ीमत नहीं है ।

दूसरी तरफ़ अगर पुरुष को लगता है कि उस पर हमला किया जा रहा है तो वह ख़ुद का बचाव करने लगता है । वह समझता है कि अगर वह अपनी बात को स्पष्ट कर देगा तो शायद पत्नी उसे दोष देना बंद कर देगी । वह अपना जितना बचाव करता है, पत्नी उतनी ही ज़्यादा परेशान होती जाती है । पुरुष को यह एहसास ही नहीं होता कि पत्नी को स्पष्टीकरण नहीं चाहिए । वह सिर्फ़ इतना चाहती है कि उसका पति उसकी तरफ़ पूरा ध्यान दे और उसकी बातों को दिलचस्पी से सुने ।

पुरुषों को ख़ास तौर पर कुंठा तब होती है जब पत्नी ऐसी समस्याओं के बारे में बात करती है जिनके बारे में वह कुछ नहीं कर सकता । उदाहरण के लिए तनावग्रस्त महिला यह शिकायत कर सकती है :

• मुझे ज़्यादा तनख़्वाह नहीं मिल रही है

• लूसी आँटी दिनों – दिन ज़्यादा बीमार हो रही हैं । हर साल उनकी बीमारी बढ़ती जा रही है ।

• हमारा घर बड़ा नहीं है ।

• कितनी गर्मी का मौसम है । न जाने बारिश कब होगी ?

• हमारा बैंक अकाउंट बिलकुल ख़ाली है ।

महिलाएँ तो सिर्फ़ अपनी चिंताएँ, निराशाएँ, कुंठाएँ कम करने के लिए इस तरह की बातें कहती हैं । वे जानती हैं कि इन समस्याओं को सुलझाया नहीं जा सकता, परंतु इनके बारे में बात करने से ही उन्हें राहत मिल जाती है । महिला अपने पति से सिर्फ़ चाहती है कि वह हमदर्दी से उसकी पूरी बात सुने, और जब पति ऐसा करता है, तो पत्नी का मूड ठीक हो जाता है ।

जब पत्नी पूरी विस्तार से समस्या बताती है, तो पुरुष अक्सर बेचैन हो जाता है । जब महिला अपनी समस्या को डिटेल में बताती है, तो पति यह ग़लत समझ लेता है कि समस्या को सुलझाने के लिए सारे डिटेल ज़रूरी हैं । वह हर डिटेल के महत्व के बारे में सोचता है और चूँकि उसे कई डिटेल महत्वपूर्ण नहीं लगते, इसलिए उसकी बेचैनी स्वाभाविक रूप से बढ़ती जाती है । वह यह नहीं जानता कि महिला अपनी समस्या सुलझाने के लिए उससे बातें नहीं कर रही है, वह तो सिर्फ़ उसको सुनाना चाहती है ।

पुरुषों को महिलाओं की बात सुनने में एक और दिक़्क़त यह आती है कि वह परिणाम की कल्पना करता रहता है । वह तब तक अपना समाधान नहीं सुझा सकता जब तक कि उसे यह न पता हो कि उस घटना का परिणाम क्या निकला । महिलाओं की आदत होती है कि वे किसी घटना को पूरे विस्तार से सुनाती हैं, और सस्पेंस बढ़ाती जाती हैं, और बहुत देर बाद परिणाम पर आती हैं । महिलाएँ पुरुषों की इस दिक़्क़त को आसानी से दूर कर सकती हैं, बशर्ते कि वे शुरुआत में ही अपनी कहानी का परिणाम बता दें और इसके बाद पूरे डिटेल सुनाएँ । पुरुष को सस्पेंस में न रखें । अगर श्रोता कोई दूसरी औरत हो, तो वह सस्पेंस को पसंद करेगी, परंतु पुरुष सस्पेंस को ज़्यादा देर तक नहीं झेल पाएगा और जल्दी ही कुंठित हो जाएगा । इसके अलावा, महिला अपने पति को यह भी याद दिला सकती है कि वह केवल अपनी समस्याओं के बारे में बात करना चाहती है ; वह अपने पति से उन्हें सुलझाने के लिए सलाह नहीं माँग रही है।

किस तरह दोनों को शांति मिल सकती है

मंगल ग्रह के पुरुष और शुक्र ग्रह की महिलाएँ इसलिए शांति से इकट्ठे रह पाए क्योंकि वे एक – दूसरे की भिन्नताओं को समझते थे और उनका सम्मान करते थे । पुरुषों ने यह जान लिया कि जब महिलाएँ समस्याओं के बारे में विस्तार से बोलती हैं, तो वे पुरुषों को दोष नहीं दे रही हैं या उनकी आलोचना नहीं कर रही हैं बल्कि वे तो सिर्फ़ अपने दिल का ग़ुबार निकाल रही हैं । महिलाओं ने जान लिया कि जब पुरुष गुफा में जाते हैं, तो वे तनावपूर्ण स्थितियों का सामना करने और समस्या का हल ढूँढ़ने के लिए जाते हैं, इसलिए नहीं कि वे महिलाओं से नाराज़ होते हैं या उनसे प्रेम नहीं करते ।

एक – दूसरे की अलग – अलग आदतों को समझने के कारण एक समय पुरुष और महिलाएँ सुख से रह पाए, और अगर वे अपनी भिन्नताओं को समझ लें, तो वे आज भी सुख से रह सकते हैं ।





अध्याय 4

जीवनसाथी को प्रेरित कैसे करें


जब मंगल ग्रह के पुरुषों ने दूरबीन से शुक्र ग्रह की महिलाओं को देखा, तो उन्हें देखकर पुरुषों को आकाश यान बनाने की प्रेरणा मिली, क्योंकि उन्हें लग रहा था कि शुक्र ग्रह की महिलाओं को उनकी ज़रूरत थी । जब शुक्र ग्रह की महिलाओं ने मंगल ग्रह के शक्तिशाली पुरुषों को आकाश यान से आते देखा, तो अचानक उन्हें लगा कि उनसे प्रेम किया जा रहा है । यह रहस्य आज भी हमारे दिलोदिमाग़ में रचा - बसा है । पुरुषों को प्रेरणा तब मिलती है, वे तब शक्तिशाली अनुभव करते हैं जब उन्हें यह लगे कि किसी को उनकी ज़रूरत है । महिलाओं को तब प्रेरणा मिलती है और वे तब शक्तिसंपन्न अनुभव करती हैं जब उन्हें यह महसूस हो कि उनसे प्रेम किया जा रहा है ।

जब किसी पुरुष को लगता है कि उसकी पत्नी को उसकी कोई ज़रूरत नहीं है, तो उसकी ऊर्जा घटने लगती है और वह दिनोंदिन निष्क्रिय होता जाता है । जब किसी महिला को लगता है कि उसका पति उससे प्रेम नहीं कर रहा है, तो वह अपनी तरफ़ से प्रेम देते - देते थक जाती है और नर्वस ब्रेकडाउन का शिकार हो जाती है । परंतु जब पुरुष को लगता है कि उसकी पत्नी को उसकी ज़रूरत है, जब महिला को लगता है कि उसका पति उससे प्रेम कर रहा है तो दोनों के संबंध सुखद हो जाते हैं ।

जब कोई पुरुष महिला से प्रेम करता है

आम तौर पर मंगल ग्रह के पुरुषों की फ़िलॉसफ़ी होती है । जीत/हार की फ़िलॉसफ़ी - मैं जीतना चाहता हूँ, और अगर आप हार जाते हैं तो मुझे परवाह नहीं है । जब तक मंगल ग्रह पर पुरुष अकेले थे, तब तक यह फ़िलॉसफ़ी आदर्श थी, क्योंकि जब तक हर पुरुष अपना ध्यान रख रहा था, तब तक चिंता की कोई बात नहीं थी । आज भी खेल जगत में हम इसी फ़िलॉसफ़ी को देखते हैं । उदाहरण के तौर पर टेनिस के खेल में मैं न सिर्फ़ जीतना चाहता हूँ, बल्कि यह कोशिश भी करता हूँ कि मेरा दोस्त हार जाए और इसलिए मैं ऐसे शॉट लगाता हूँ जिन्हें वह लौटा न सके । परंतु वयस्क संबंधों में यह जीत/हार का दृष्टिकोण काफ़ी नुक़सानदायक होता है । अगर मैं अपने पार्टनर को हराकर अपनी ज़रूरतों को पूरा करता हूँ, तो इससे कुछ समय बाद हमारे रिश्तों में दुख, विद्वेष, संघर्ष और शिकायतें आ जाएँगी । सफल संबंध का रहस्य यह है कि दोनों ही पार्टनर जीतें ।

भिन्नताओं में आकर्षण होता है

जब दोनों ग्रह के लोगों ने एक - दूसरे को देखा, तो आपसी भिन्नताओं के कारण उनमें एक - दूसरे के प्रति आकर्षण पैदा हुआ । पुरुष सख़्त थे, महिलाएँ कोमल थीं । पुरुष एंग्युलर थे, महिलाएँ राउंड थीं । पुरुष ठंडे थे, महिलाएँ गर्म थीं । जादुई और आदर्श तरीक़े से उनकी भिन्नताएँ उन्हें एक - दूसरे के साथ जोड़कर पूर्ण बना रही थीं ।

महिलाओं ने बिना कहे ही मंगल ग्रह के पुरुषों को बता दिया था, " हमें तुम्हारी ज़रूरत है । तुम आकर हमारे जीवन के ख़ालीपन को भर दो । हम इकट्ठे सुखी रह सकते हैं । " इस आमंत्रण से मंगलवासी प्रेरित हुए और उनमें शक्ति आ गई ।

कई महिलाएँ सहज अनुभूति से जानती हैं कि इस तरह का संदेश कैसे पहुँचाया जा सकता है । किसी भी रिश्ते की शुरुआत में महिला किसी पुरुष को आँख के हल्के इशारे से बता सकती है कि तुम मुझे सुखी बना सकते हो । इस तरह वह उस पुरुष को यह शक्ति प्रदान करती है कि वह उसके क़रीब आए । इससे पुरुष के दिल से डर निकल जाता है और वह आगे बढ़ जाता है । दुर्भाग्य से, एक बार रिश्ता जुड़ जाने पर और समस्याएँ आने पर महिला को यह ध्यान नहीं रहता कि वह संदेश अब भी पुरुष के लिए कितना महत्वपूर्ण है और इसलिए वह उस संदेश को भेजना बंद कर देती है ।

मंगल ग्रह के पुरुषों को प्रेम से प्रेरणा मिलती है

जब कोई पुरुष प्रेम करता है तो वह अपनी प्रेमिका की सेवा में ज़मीन - आसमान एक कर देता है । जब उसका दिल प्रेम से भरा होता है, तो उसमें इतना आत्मविश्वास आ जाता है कि वह बड़े से बड़ा काम कर सकता है । जब उसे अपनी क्षमता साबित करने का अवसर मिलता है, तो वह अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में होता है ।

जब कोई पुरुष प्रेम करता है, तो वह दूसरे व्यक्ति का भी उतना ही ख़्याल रखता है जितना कि अपना । ज़्यादातर पुरुष प्रेम के भूखे हैं । इसी कारण वे उतना दे नहीं पाते, जितनी कि उनमें क़ाबिलियत है । जब रिश्ते में दरार पड़ती है, तो पति निराश हो जाता है और अपनी गुफा में चला जाता है । वह सामने वाले का ख़याल रखना छोड़ देता है और उसे समझ में नहीं आता कि वह निराश क्यों है ।

वह ख़ुद से पूछता है कि इसमें परेशान होने की क्या बात है । वह नहीं जानता कि उसने सामने वाले का ख़्याल रखना इसलिए छोड़ दिया है, क्योंकि उसके हिसाब से सामने वाले को उसकी ज़रूरत नहीं है । अगर उसे कोई ऐसी महिला मिल जाए जिसे उसकी ज़रूरत हो, तो वह अपनी निराशा के जाल से बाहर निकलकर एक बार फिर प्रेरित हो सकता है ।

जब किसी पुरुष को यह लगता है कि उसकी वजह से किसी और के जीवन में कोई अंतर नहीं पड़ रहा है, तो वह उस रिश्ते पर ध्यान देना छोड़ देता है । जब तक उसे यह नहीं लगेगा कि किसी को उसकी ज़रूरत है, तब तक उसे प्रेरणा नहीं मिलेगी । अगर महिला उसे यह जता दे कि उसे उसकी ज़रूरत है, वह उस पर विश्वास करती है, और उसकी योग्यता का सम्मान करती है, तो वह तत्काल प्रेरित हो सकता है । अगर आदमी को यह लगने लगे कि किसी को उसकी ज़रूरत नहीं है, तो फिर उसकी ज़िंदगी स्लो डैथ या धीमी मृत्यु बन जाती है ।

जब कोई महिला पुरुष से प्रेम करती है

शुक्र ग्रह की महिलाएँ देते - देते थक चुकी थीं । वे प्रेम की भूखी थीं । वे चाहती थीं कि कोई उनका ख़्याल रखे । जब मंगल ग्रह के पुरुष आए, तो उन्हें एक ऐसा हमसफ़र मिल गया जो उनका ख़याल रखता था, उनसे प्रेम करता था और उनके सुख - दुख बाँट सकता था । ज़्यादातर पुरुषों को तो यह एहसास ही नहीं होता कि महिलाओं को प्रेम की कितनी ज़्यादा ज़रूरत होती है । वे चाहती हैं कि कोई सच्चे दिल से उन्हें सहारा दे । जब महिलाओं को विश्वास होता है कि उन्हें भावनात्मक सहारा मिल रहा है तो वे ख़ुश रहती हैं । जब कोई महिला विचलित, परेशान, या निराश होती है तो उसे जिस चीज़ की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है वह है केवल एक हमदर्द की । उसे यह लगना चाहिए कि वह अकेली नहीं है । उसे यह लगना चाहिए कि उससे प्रेम किया जा रहा है, उसे चाहा जा रहा है ।

अगर पुरुष हमदर्दी जताए, उसकी भावनाओं को समझे और ध्यान से महिला की बात सहानुभूतिपूर्वक सुने तो महिला का दुख अपने आप कम हो जाता है । परंतु पुरुष यह बात समझते ही नहीं । चूँकि वे परेशान होने पर अपनी गुफा में जाना पसंद करते हैं, इसलिए उन्हें लगता है कि महिलाएँ भी यही चाहती होंगी । इसलिए जब भी महिलाएँ परेशान होती हैं, पुरुष उन्हें अकेला छोड़ देते हैं या अगर पुरुष आस - पास रहता भी है तो वह उसकी समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करके माहौल को और ख़राब कर देता है । वह यह नहीं समझ पाता कि महिला को केवल क़रीब रहने, अंतरंगता और अपने दुख बाँटने से ही आराम मिल जाता है । महिला सिर्फ़ यह चाहती है कि उसका पति मन लगाकर उसकी बात सुने ।

ज़्यादा देते - देते कोई भी थक जाएगा

शुक्र ग्रह पर महिलाएँ हार / जीत की फ़िलॉसफ़ी के हिसाब से रहती थीं - मैं हार मानती हूँ ताकि तुम जीत सको । जब तक हर महिला दूसरों के लिए त्याग करती थी, तब तक सब कुछ आदर्श था । सदियों तक महिलाएँ दूसरों के लिए त्याग करती आई थीं और हर चीज़ बाँटती आई थीं, क्योंकि वे इसी फ़िलॉसफ़ी में विश्वास करती थीं । परंतु जब मंगल ग्रह के पुरुष आए, तो महिलाएँ भी जीत/जीत की फ़िलॉसफ़ी के लिए तैयार थीं ।

आज भी अधिकांश महिलाएँ देते - देते थक चुकी हैं । उन्हें कुछ समय अपने लिए चाहिए ताकि वे ख़ुद की तरफ़ ध्यान दे सकें । उन्हें ऐसा व्यक्ति चाहिए जो उन्हें भावनात्मक सहारा दे सके, उन्हें ऐसा व्यक्ति नहीं चाहिए जिसे उन्हें हर पल सहारा देना पड़े । मंगल ग्रह के पुरुषों के आने पर उन्हें वह आदर्श व्यक्ति मिल गया । शुक्र ग्रह की महिलाओं ने सीखा कि किस तरह लिया जाता है और मंगल ग्रह के पुरुषों ने सीखा कि किस तरह दिया जाता है ।

आज भी हम देखते हैं कि जब महिलाएँ कम उम्र की होती हैं, तो उनमें त्याग करने की, अपनी क़ीमत पर दूसरों को ख़ुश करने की इच्छा होती है । जब पुरुषों की उम्र कम होती है, तो वे बहुत स्वार्थी होते हैं और उन्हें दूसरों की ज़रूरतों की परवाह नहीं होती । परंतु जब महिला परिपक्व हो जाती है तो उसे लगता है कि वह देती ही क्यों रहे, उसे सामने वाले से भी कुछ मिलना चाहिए । इसी तरह जब पुरुष परिपक्व होता है तो वह महसूस करता है कि दूसरों की ज़रूरतों का ध्यान रखने में ही सच्चा सुख मिलता है ।

पाना सीखना

पाने के विचार से महिलाएँ डर जाती हैं । उन्हें तिरस्कार और छोड़ दिए जाने का डर होता है । वे अपने मन में सोचती हैं कि उन्हें जितना मिल रहा है, वे उससे ज़्यादा की हक़दार नहीं हैं, वे इससे ज़्यादा के योग्य नहीं हैं । यह बात उन्होंने अपने बचपन में ही सीख ली थी, जब वे अपनी भावनाओं, इच्छाओं और ज़रूरतों को दबाया करती थीं ।

चूँकि महिला इस बात से डरती है कि पुरुष उसे छोड़ देगा, इसलिए वह उसके सामने ज़्यादा माँगें नहीं रखती । परंतु मन ही मन वह चाहती ज़रूर है कि उसे सुखी रहने के लिए ज़्यादा चीज़ों की ज़रूरत है । अगर वह अपनी बातों को खुलकर कहे तो समस्या सुलझ सकती है । उसे अपने पति से साफ़ कह देना चाहिए और अपनी सीमा बना लेनी चाहिए । जैसे अगर पति ज़ोर से चिल्ला रहा हो या कटु शब्द बोल रहा हो, तो पत्नी को साफ़ कह देना चाहिए, “देखिए, आप जिस तरह बात कर रहे हैं, मुझे अच्छा नहीं लग रहा है । या तो आप चिल्लाना बंद कर दें या फिर मैं दूसरे कमरे में चली जाऊँगी ।” अगर पति के किसी आग्रह को पत्नी नापसंद करती हो, तो उसे साफ़ कह देना चाहिए, “नहीं, अभी नहीं, अभी मैं आराम करना चाहती हूँ या आज मैं बहुत परेशान हूँ ।” अगर पति पत्नी की बात को बीच में काट दे, तो पत्नी को साफ़ कह देना चाहिए, “अभी मेरी पूरी बात ख़त्म नहीं हुई है । प्लीज़ मेरी बात पूरी होने दें ।” पत्नी को यह नहीं सोचना चाहिए कि चूँकि वह ज़िंदगी भर देती ही आई है, त्याग ही करती आई है, तो उसका पति अपने आप उसकी भावनात्मक ज़रूरतों का ख़याल रखेगा । शायद पति को यह पता ही न हो कि पत्नी की भावनात्मक ज़रूरत क्या है । इसलिए बेहतर होगा कि महिला देने के बजाय लेने की प्रवृत्ति पर ध्यान दे और देने की सीमा तय कर ले, यानी इस सीमा तक तो त्याग ठीक है, पर इसके बाद साफ़ शब्दों में कह देना ही बेहतर है । इससे यह फ़ायदा होगा कि पति समझ जाएगा कि पत्नी की भावनात्मक ज़रूरतें क्या हैं, और वह आगे से अपनी पत्नी का ज़्यादा ध्यान रखेगा ।

जब भी एक पार्टनर अपने में कोई सकारात्मक परिवर्तन करता है, तो दूसरे में भी बदलाव होता है । इसलिए अगर आप ख़ुद को सुधार लेंगे, तो आपकी पत्नी अपने आप सुधर जाएगी ।

पुरुष के लिए यह जानना ज़रूरी है कि ग़लतियाँ सबसे होती हैं और गलती होना कोई बुरी बात नहीं है । पुरुष महिला का हीरो बनना चाहता है और इसलिए वह चाहता है कि पत्नी की नज़रों में उसकी छवि आदर्श हो । जब उससे गलती होती है, तो उसे लगता है कि यह छवि टूट गई है, इसलिए वह परेशान हो जाता है । जब महिला निराश होती है या दुखी होती है तो पुरुष को लगता है कि चूंकिवह असफल हो गया है, इसलिए महिला परेशान है । पुरुषों का सबसे बड़ा डर होता है : असफलता । इसलिए जब महिला समस्याओं का रोना रोती है, तो पुरुषों को यह पसंद नहीं आता क्योंकि इससे वे ख़ुद को असफल समझने लगते हैं ।

एक युवती परेशान थी कि उसका प्रेमी उसके सामने शादी का प्रस्ताव नहीं रख रहा था । युवती को लग रहा था कि शायद वह उससे उतना प्रेम नहीं करता, जितना वह उससे करती है । एक दिन युवती ने कहा कि वह उसके साथ हमेशा सुखी रहेगी, चाहे उन्हें ग़रीबी में रहना पड़े । अगले ही दिन उसके प्रेमी ने उसके सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया । उसे यही तो चाहिए था कि उसकी प्रेमिका उसे स्वीकार करे और माने कि वह उसके लिए आदर्श है । एक बार वह अपनी प्रेमिका की नज़रों में हीरो बन गया तो उसने शादी का प्रस्ताव रखने में देर नहीं की ।





अध्याय 5

दोनों अलग–अलग भाषाएँ बोलते हैं


जब मंगल ग्रह के पुरुष और शुक्र ग्रह की महिलाएँ पहली बार मिले, तो उनके बीच कई समस्याएँ उत्पन्न हुईं जिनका सामना हम आज भी करते हैं । परंतु चूँकि वे जानते थे कि वे भिन्न हैं, इसलिए वे इन समस्याओं को सुलझा सके । उनकी सफलता का एक रहस्य अच्छा संप्रेषण था ।

यह अजीब बात है कि उनमें संवाद इसलिए बेहतर था, क्योंकि वे अलग–अलग भाषा बोलते थे । जब भी कोई विवाद होता था तो वे एकदम से लड़ने नहीं लगते थे, बल्कि अपनी डिक्शनरी खोलकर देखते थे कि सामने वाले की बात का असली मतलब क्या है । अगर डिक्शनरी से भी उन्हें पूरा मतलब समझ में नहीं आता था, तो वे अनुवादक की मदद लेते थे ।

हालाँकि मंगल और शुक्र ग्रह की भाषाओं में शब्द एक से थे, परंतु उनके अर्थ अलग–अलग थे । उनके शब्दों में कही जाने वाली बात अलग–अलग थी । एक दूसरे की बात का ग़लत मतलब निकालना बहुत आसान था । इसलिए जब भी उनके सामने संवाद की समस्या आती थी, तो वे अनुमान लगा लेते थे कि शायद वे एक–दूसरे की बात ठीक से नहीं समझ पाए हैं और इसी वजह से उनके बीच ग़लतफ़हमी पैदा हो रही है ।

भावनाओं को अभिव्यक्त करना और सूचना अभिव्यक्त करना

आज भी हमें अनुवादकों की ज़रूरत है । जब महिलाएँ और पुरुष एक ही शब्द बोलते हैं, तो उनके मतलब एक से नहीं होते । उदाहरण के तौर पर जब महिला कहती है, “मुझे लगता है तुम मेरी बात कभी सुनते ही नहीं हो,” तो उसे यह उम्मीद नहीं होती कि उसके “कभी नहीं” को शब्दशः लिया जाएगा । “कभी नहीं” बोलकर तो वह अपनी कुंठा और परेशानी अभिव्यक्त कर रही है । इसे तथ्यात्मक मानना भूल होगी और पुरुष आम तौर पर यही भूल करते हैं ।

अपनी भावनाओं को पूरी तरह से अभिव्यक्त करने के लिए महिलाएँ आम तौर पर अतिशयोक्तियों, अलंकारों और इसी तरह की दूसरी स्वतंत्रताओं का भरपूर उपयोग करती हैं । पुरुष ग़लती से इनका वास्तविक, तथ्यात्मक और शब्दशः अर्थ लगाते हैं, इसीलिए उनका रवैया सकारात्मक नहीं रहता । नीचे दस आम शिकायतें दी जा रही हैं, जिनके बारे में पुरुष का रवैया नकारात्मक होता है ।

दस आम शिकायतें जिनके बारे में ग़लतफ़हमी होती है




आप देख सकते हैं कि पुरुषों को यह ग़लतफ़हमी हो जाती है कि महिला तथ्यात्मक बात कह रही है और इसलिए वे उसकी बातों का शब्दशः मतलब निकालते हैं । पुरुष आम तौर पर केवल तथ्यों और सूचना के आदान–प्रदान के लिए भाषा का प्रयोग करते हैं इसलिए उन्हें इस तरह की ग़लतफ़हमी होना स्वाभाविक है । इसी वजह से महिलाओं को पुरुषों से सबसे बड़ी शिकायत यह रहती है कि “वे पूरी बात नहीं सुनते ।” महिलाओं की यह शिकायत जायज़ है कि पुरुष उसकी बात का ग़लत मतलब निकालते हैं और उनका सही अर्थ नहीं समझ पाते ।

जब महिला कहती है, “तुम मेरी बात नहीं सुन रहे हो ।” तो पुरुष को गु़स्सा आ जाता हैं । उसने जो सुना है वह उसे दोहरा सकता है,–एक–एक शब्द । परंतु महिला के कहने का मतलब तथ्यात्मक नहीं होकर यह है, “मुझे लगता है कि तुम मेरी बात पूरे ध्यान से नहीं सुन रहे हो । तुम मुझे यह जताओ जैसे मेरी बातों में तुम्हारी पूरी रुचि है ।”

अगर पुरुष को उसकी असली शिकायत समझ में आ जाए तो वह भड़केगा नहीं और उस शिकायत को दूर करने की कोशिश करेगा । जब पुरुष और महिलाएँ लड़ते हैं, तो ज़्यादातर मामलों में ऐसा संवाद की ग़लतफ़हमी की वजह से होता है । ऐसे समय में यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि हमने जो सुना है उसका असली अर्थ समझने के लिए हम अनुवाद का सहारा लें । इसके लिए हमें शुक्र/मंगल डिक्शनरी का सहारा लेना चाहिए ।

जब शुक्र ग्रह महिलाएँ बोलें

यहाँ हम शुक्र/मंगल डिक्शनरी से कुछ वाक्यांश प्रस्तुत कर रहे हैं । ऊपर दी गई दस शिकायतों का सही अर्थ दिया जा रहा है ताकि पुरुष को असली बात समझ में आ जाए ।

शुक्र / मंगल डिक्शनरी

“हम कभी बाहर नहीं जाते ।” इस वाक्यांश का मंगल ग्रह की भाषा में यह अनुवाद होगा : “मैं बाहर जाना चाहती हूँ और तुम्हारे साथ समय बिताना चाहती हूँ । हम जब साथ होते हैं तो मुझे बहुत अच्छा लगता है । तुम्हारा इस बारे में क्या विचार है? क्या तुम मुझे डिनर के लिए बाहर ले जाओगे? हमें बाहर गए कई दिन भी हो गए हैं ।”

इस अनुवाद के बिना जब पुरुष यह वाक्य सुनता है, तो उसे यह समझ में आता है, “तुम अपना काम ठीक से नहीं कर रहे हो । तुम कितने बोर आदमी हो । हम एक साथ कुछ भी सिर्फ़ इसलिए नहीं कर पाते, क्योंकि तुम आलसी, अनरोमांटिक और बोरिंग हो।”

“सभी मुझे नज़रअंदाज़ कर देते हैं ।” मंगल ग्रह की भाषा में इसका अनुवाद है : “आज मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि कोई मेरी तरफ़ ध्यान नहीं दे रहा है । हालाँकि कई लोग मुझे देखते हैं, परंतु मैं सोचती हूँ कि कोई मुझे महत्व नहीं दे रहा है । मैं इसलिए भी निराश हूँ क्योंकि तुम भी इन दिनों व्यस्त हो । मैं तुम्हारी कड़ी मेहनत की तारीफ़ करती हूँ, परंतु न जाने क्यों कई बार मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं तुम्हारे लिए महत्वपूर्ण नहीं हूँ । मुझे डर है कि तुम्हारी नज़रों में तुम्हारा काम मुझसे ज़्यादा महत्वपूर्ण है । क्या तुम मुझे गले लगाकर यह बताओगे कि तुम मुझसे कितना प्रेम करते हो?”

इस अनुवाद के बिना पुरुष इस वाक्य का यह मतलब निकालता है, “मैं बहुत दुखी हूँ । मेरी तरफ़ तुम्हें जितना ध्यान देना चाहिए, तुम उतना ध्यान नहीं दे रहे हो । तुमने मुझसे शादी की है, तुम्हें तो मुझसे प्रेम करना चाहिए । तुम्हें अपने बर्ताव पर शर्म आनी चाहिए । तुम मुझसे बिलकुल प्रेम नहीं कर रहे हो । मैं तुम्हें कभी इस तरह से नज़रअंदाज़ करने की बात सोच भी नहीं सकती ।”

“मैं थक चुकी हैं, मैं कुछ नहीं कर सक्ती ।” मंगल ग्रह की भाषा में इसका अनुवाद यह है, “मैंने आज बहुत काम किया है ! अब मुझे आराम की ज़रूरत है । मैं ख़ुशक़िस्मत हूँ कि मेरे पास तुम्हारा सहारा है । क्या तुम गले लगाकर मुझे आश्वस्त करोगे कि मैं बहुत बढ़िया काम कर रही हूँ और मुझे आराम की ज़रूरत है?”

बिना इस अनुवाद के पुरुष को यह सुनाई देता है, “सारा काम मैं ही करती हूँ और तुम कुछ भी नहीं करते । तुम्हें ज़्यादा काम करना चाहिए । मैं सारा काम नहीं कर सकती । मैं बहुत परेशान हूँ । मुझे कोई असली ‘मर्द‘ मिलना चाहिए था । तुमसे शादी करके मैंने बहुत बड़ी भूल की है ।”

“मैं हर चीज़ भूल जाना चाहती हूँ ।” मंगल ग्रह की भाषा में इसका अनुवाद है, “मैं तुम्हें बताना चाहती हूँ कि मैं अपने काम और अपने जीवन से प्रेम करती हूँ, परंतु आज मैं परेशान हूँ । क्या तुम मुझसे यह नहीं पूछोगे, “क्या बात है?” और फिर बिना समाधान सुझाए मेरी बात हमदर्दी से सुनोगे? मैं सिर्फ़ यह चाहती हूँ कि तुम मेरे तनाव और मेरी परेशानियों को जान लो । इतने भर से मैं बेहतर अनुभव करने लगूँगी ।”

इस अनुवाद के बिना पुरुष इस वाक्य से यह समझता है, “मुझे इतना काम करना पड़ता है कि अब मेरी काम करने की बिलकुल इच्छा ही नहीं है । मैं तुमसे ज़रा भी ख़ुश नहीं हूँ । मैं एक बेहतर पार्टनर चाहती हूँ जो मेरे जीवन को ज़्यादा सुखद बना सके । तुमसे तो कुछ होता ही नहीं है ।”

“घर हमेशा कचरेघर की तरह दिखता है ।” मंगल ग्रह की भाषा में इसका अनुवाद है, “आज मेरा मूड आराम करने का हो रहा है, परंतु घर की हालत बहुत ख़राब है । मैं कुंठित हूँ क्योंकि मुझे आराम की ज़रूरत है । मैं तुमसे सारा कचरा साफ़ करने की उम्मीद नहीं करती । परंतु कितना अच्छा हो, अगर तुम भी यह मान लो कि घर में सफ़ाई की ज़रूरत है और इस काम में मेरा हाथ बँटाओ ।”

इस अनुवाद के बिना पुरुष को यह सुनाई देता है, “यह घर तुम्हारी वजह से कचराघर बना हुआ है । मैं इसे साफ़ करती रहती हूँ और तुम इसे गंदा करते रहते हो । तुम बहुत ही निखट्टू क़िस्म के आदमी हो और अगर तुम अपनी आदतें नहीं बदलते, तो मैं तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहती । या तो सफ़ाई करो या फिर घर से दफा हो जाओ ।”

“कोई भी मेरी बात कभी नहीं सुनता ।” मंगल ग्रह की भाषा में इसका अनुवाद है, “मुझे लगता है कि मेरी बातें सुनकर तुम बोर हो जाते हो । मुझे डर है कि तुम्हारी अब मुझमें कोई दिलचस्पी नहीं रह गई है । मैं आज बहुत भावुक हूँ । क्या आज तुम मेरी तरफ़ ख़ास ध्यान दोगे? मुझे यह अच्छा लगेगा। आज मेरा दिन अच्छा नहीं गुज़रा। मुझे ऐसा लगता है जैसे कोई मेरी बात सुनना ही नहीं चाहता । क्या तुम मुझसे इस तरह के सवाल पूछोगे, “आज क्या हुआ? और क्या हुआ? तुम्हें कैसा लगा?” इस तरह के प्रेमपूर्ण वाक्य बोलकर क्या तुम मुझे सहारा दोगे, “मुझे और बताओ” या “यह सही है” या “मैं समझ सकता हूँ तुम्हारा क्या मतलब है” या “में समझता हूँ हुँ?” या क्या तुम सिर्फ चुपचाप मेरी पूरी बात ध्यान लगाकर सुनोगे?”

इस अनुवाद के बिना पुरुष इस वाक्य का यह मतलब निकालता है, “मैं तुम्हारी तरफ़ पूरा ध्यान देती हूं हूँ, परंतु तुम मेरी बात नहीं सुनते हो। शादी से पहले तो तुम मेरी बातें बहुत मन लगाकर सुना करते थे । अब तुम बहुत बोरिंग आदमी बन चुके हो । मुझे अब कोई ज़्यादा रोमांचक और दिलचस्प आदमी ढूँढ़ना पड़ेगा क्योंकि तुम कभी रोमांचक या दिलचस्प नहीं हो सकते । तुमने मुझे निराश किया है । तुम स्वार्थी हो, बुरे हो, मेरा बिलकुल ध्यान नहीं रखते हो।”

“कोई चीज़ ठीक नहीं है” मंगल ग्रह की भाषा में इसका अनुवाद है, “आज मैं बहुत परेशान हूँ । मैं कृतज्ञ हूँ कि मैं तुम्हारे साथ अपनी भावनाएँ बाँट सकती हूँ । आज मेरे कई काम ठीक नहीं हुए । इस वजह से मैं बहुत परेशान हूँ । क्या तुम मुझे गले लगाकर यह बताओगे कि मैं बहुत बढ़िया काम करती हूँ? मुझे यह सुनकर बहुत अच्छा लगेगा ।”

इस अनुवाद के बिना पुरुष को यह लग सकता है, “तुम कभी कोई काम ठीक से नहीं करते । मुझे तुम पर बिलकुल भी भरोसा नहीं है । अगर मैंने तुम्हारी सलाह नहीं मानी होती, तो आज मेरा यह हाल नहीं होता । दूसरे आदमी ने चीज़ों को बेहतर ढँग से किया होता, परंतु तुमने हर चीज़ को गड़बड़ कर दिया ।”

“तुम अब मुझसे बिलकुल प्यार नहीं करते।” मंगल ग्रह की भाषा में इसका अनुवाद है, “आज मुझे ऐसा लग रहा है जैसे तुम मुझसे प्रेम नहीं करते। मैं जानती हूँ कि तुम मुझसे सचमुच प्यार करते हो, तुम मेरा बहुत ध्यान रखते हो। परंतु आज मेरे मन में असुरक्षा की भावना आ गई है । क्या तुम मुझे आश्वस्त करोगे कि तुम मुझसे प्रेम करते हो, क्या तुम मुझसे वह तीन जादुई शब्द कहोगे, “आई लव यू”? जब तुम ऐसा कहते हो, तो सुनकर दिल ख़ुश हो जाता है ।”

इस अनुवाद के बिना पुरुष को यह सुनाई देता है, “मैंने बरसों तक तुम्हारे लिए क्या कुछ नहीं किया और बदले में मुझे तुमसे कुछ भी नहीं मिला। तुमने मेरा शोषण किया है। तुम स्वार्थी और नीरस हो । तुम अपनी मनमानी करते हो, सिर्फ़ अपने लिए जीते हो और अपनी मर्ज़ी का काम करते हो । तुम किसी और के बारे में सोचते ही नहीं हो । मैं कितनी मूर्ख थी जो तुम जैसे आदमी से प्यार कर बैठी ।”

“हम हमेशा जल्दी मैं रहते हैं ।” मंगल ग्रह की भाषा में इसका अनुवाद है, “मैं आज बहुत हड़बड़ी में हूँ। मुझे जल्दबाज़ी बिलकुल पसंद नहीं है । मैं चाहती हूँ कि हम जल्दबाज़ी का जीवन न गुज़ारें । मैं जानती हूँ कि इसमें किसी की गलती नहीं है और तुम्हारी तो बिलकुल भी नहीं है । मैं जानती हूँ कि तुम हमें वहाँ समय पर ले जाना चाहते हो और मैं तुम्हारी सचमुच प्रशंसा करती हूँ कि तुम मेरा कितना ध्यान रखते हो। क्या तुम मुझसे हमदर्दी के दो शब्द कहोगे, “जल्दबाज़ी या हड़बड़ी मुझे भी पसंद नहीं है, इससे मुझे भी तकलीफ़ होती है ।”

इस अनुवाद के बिना पुरुष को यह सुनाई देता है, “तुम ग़ैरज़िम्मेदार हो। तुम हर काम को आख़िरी मिनट पर ही करते हो । जब मैं तुम्हारे साथ रहती हूँ तो कभी ख़ुश नहीं रह पाती । हम हमेशा जल्दबाज़ी में रहते हैं, ताकि हमें पहुँचने में देर न हो जाए । जब तुम आस–पास नहीं होते तो मैं ज़्यादा ख़ुश रहती हूँ ।”

“में ज़्यादा रोमांस चाहती हूँ।” मंगल ग्रह की भाषा में इसका अनुवाद है, “तुम आजकल इतनी कड़ी मेहनत कर रहे हो । क्यों न हम कुछ समय बाहर साथ–साथ–साथ गुजारे? जब हम अकेले कहीं जाते हैं, तो मुझे बहुत अच्छा लगता है । तुम कितने रोमांटिक हो? क्या तुम–कभी–कभार मेरे लिए फूल लाकर मुझे ख़ुश करोगे या मुझे डेट पर लेकर चलोगे । हमारी ज़िंदगी में रोमांस का पुट मुझे अच्छा लगता है ।”

बिना इस अनुवाद के पुरुष को यह सुनाई देता है, “तुम बिलकुल रोमांटिक नहीं हो । तुमने मुझे कभी संतुष्ट नहीं किया । काश तुम दूसरे मर्दों की तरह रोमांटिक होते !”

कई वर्षों तक इस डिक्शनरी का प्रयोग करने के बाद पुरुषों को महिलाओं का व्यवहार और उनके सोचने का ढँग समझ में आ जाता है । वे यह समझ जाते हैं कि महिलाओं की बात का असली मतलब क्या है । और इसके बाद उनके बीच कोई ग़लतफ़हमी नहीं रहती । शुक्र ग्रह पर इन वाक्यों के यह अर्थ होते हैं और मंगल ग्रह के पुरुषों को यह बात कभी नहीं भूलनी चाहिए ।

जब मंगल ग्रह के पुरुष नहीं बोलते

जब पुरुष बोलना बंद कर देते हैं, तो स्वाभाविक रूप से महिलाओं को उनके विचार समझने में कठिनाई होती है । चुप्पी का महिलाएँ गलत मतलब लगा लेती हैं। हमें यह समझ लेना चाहिए कि पुरुष और महिलाएँ अलग–अलग तरीक़ों से सोचते हैं । महिलाएँ बोलकर सोचती हैं यानी बोलने के साथ ही सोचती हैं। परंतु पुरुष पहले पूरी बात पर अच्छे से विचार करते हैं, इसके बाद ही वे बोलते हैं । जब पुरुष चुप रहते हैं, तो महिला को यह समझ लेना चाहिए कि वह अभी सोच रहा है, उसका चिंतन अभी पूरा नहीं हुआ है । इसके बजाय महिला यह अनुमान लगाती है कि पुरुष शायद यह कह रहा है, “मैं तुम्हें इसलिए कुछ नहीं बता रहा हूँ क्योंकि मुझे तुम्हारी कोई परवाह नहीं है और मैं तुम्हें नज़रअंदाज़ कर रहा हूँ । तुम्हारी बातें महत्वपूर्ण नहीं हैं और इसलिए मैं उनका जवाब देने की ज़रूरत नहीं समझता ।”

महिला पुरुष की चुप्पी पर

क्या प्रतिक्रिया देती है

महिला पुरुष की चुप्पी का गलत मतलब समझ लेती हैं– “वह मुझसे नफ़रत करता है, वह मुझसे प्रेम नहीं करता, वह मुझे छोड़कर जाने वाला है ।” महिलाएँ तभी चुप होती हैं जब वे किसी का दिल नहीं दुखाना चाहतीं या जब उन्हें सामने वाले व्यक्ति पर विश्वास नहीं होता। इसी वजह से पुरुषों की चुप्पी वे ग़लत का मतलब लगा लेती हैं। परंतु अगर महिलाएँ पुरुषों की गुफा का रहस्य जान लें, तो उनके लिए पुरुष की चुप्पी का सही अर्थ समझना आसान हो जाएगा ।

गुफा को समझना

महिलाओं को यह समझ लेना चाहिए कि जब भी कोई पुरुष तनाव में या दबाव में या परेशान होगा तो वह एकदम से बोलना बंद कर देगा और अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए गुफा में चला जाएगा। महिलाओं को यह जान लेना चाहिए कि उस गुफा में किसी को भी जाने की अनुमति नहीं है, उसके सबसे पक्के दोस्तों को भी नहीं। मंगल ग्रह की परंपरा यही थी। महिला को यह नहीं सोचना चाहिए कि उसने कोई गलत काम या गंभीर अपराध कर दिया है। इसके बजाय उसे यह समझना चाहिए कि कुछ समय बाद समस्या का हल मिल जाने पर पुरुष अपने आप गुफा से बाहर निकल आएगा और सब कुछ ठीक हो जाएगा।

यह सबक़ महिलाओं के लिए बहुत कठिन है क्योंकि शुक्र ग्रह का स्वर्णिम नियम यह था : जब कोई दोस्त परेशान हो, तो उसका साथ मत छोडो। इसी कारण जब मंगल ग्रह का उसका मनपसंद पुरुष परेशान होता है, तो वह उसका साथ नहीं छोड़ना चाहती। चूँकि वह उससे प्रेम करती है, इसलिए महिला चाहती है कि वह गुफा में जाकर उसकी मदद करे।

इसके अलावा वह इस ग़लतफ़हमी में भी रहती है कि अगर वह उससे समस्या के बारे में ढेर सारे सवाल पूछेगी और उसकी बातों को पूरी रुचि से सुनेगी तो उसका मूड ठीक हो जाएगा। इससे मंगल ग्रह के लोगों का मूड और ख़राब हो जाता है। महिला के इरादे बहुत नेक होते हैं, परंतु उसका परिणाम बिलकुल उल्टा होता है।

पुरुष अपनी गुफा में क्यों जाते हैं?

पुरुषों के गुफा में जाने के या एकदम से चुप हो जाने के कई कारण होते हैं।

1.वह किसी समस्या पर विचार करना चाहता है और उसका हल ढूँढ़ना चाहता है।

2.उसके पास किसी प्रश्न या समस्या का कोई जवाब या समाधान नहीं है।

3.वह तनाव में है या परेशान है । उसे कुछ देर अकेलापन चाहिए ताकि वह अपने आपको सामान्य कर ले ।

4.वह आत्म–अवलोकन करना चाहता है । जब पुरुष प्रेम में होते हैं, तो यह चौथा कारण बहुत महत्वपूर्ण बन जाता है । प्रेम में पुरुष अक्सर अपने आपको भूलने लगते हैं, इसलिए उन्हें लगता है कि ज़्यादा अंतरंगता की वजह से उनकी शक्ति कम हो रही है । उनके दिमाग़ की अलार्म बेल बज उठती है और वे अपनी गुफा में चले जाते हैं, ताकि आत्म–आत्म–अवलोकन कर सकें। कुछ समय बाद वे तरोताज़ा होकर गुफा से बाहर निकलते हैं और ज़्यादा जोश से प्रेम करने लगते हैं।

महिलाएँ क्यों बोलती हैं

महिलाएँ कई कारणों से बोलती हैं, जिनमें से चार कारण यह हैं :

1.सूचना का आदान–प्रदान–प्रदान करने के लिए। (आम तौर पर पुरुषों के बोलने का यही इकलौता कारण होता है ।)

2.यह जानने के लिए कि वह क्या बोलना चाहती है । (ऐसे समय पुरुष चुप हो जाएगा और सोचेगा कि वह क्या बोलना चाहता है। महिलाएँ बोलते–बोलते–बोलते ही सोचने की कला में माहिर होती हैं ।)

3.जब वह परेशान होती हैं, तो अपना मूड ठीक करने के लिए। (जब पुरुष परेशान होता है, तो वह बोलना बंद कर देता है ।)

4.अंतरंगता बनाने के लिए। (मंगल ग्रह का पुरुष ऐसे समय आत्म–अवलोकन के लिए गुफा में चला जाता है, क्योंकि उसे लगता है कि ज़्यादा अंतरंगता से उसकी शक्ति छिन रही है।)

इन भिन्नताओं को समझे बिना साथ–साथ–साथ ख़ुश रहना बहुत मुश्किल है ।

राक्षस जला देता है

महिलाओं को यह बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिए कि जब पुरुष अपनी गुफा में हो, तो उसे अकेला छोड़ देना चाहिए । अमेरिकी जनजाति में एक पुरानी कहानी है । शादी के समय माँ अपनी पुत्री को यह कहानी सुनाती है । माँ कहती है कि जब भी कोई पुरुष तनाव में होगा या परेशान होगा तो वह अपनी गुफा में चला जाएगा । ऐसा कई बार होगा और इससे महिला को परेशान नहीं होना चाहिए। इसका यह मतलब नहीं है कि वह महिला से प्रेम नहीं करता । वह वापस लौट आएगा । सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि महिला को उसकी गुफा में उसके पीछे–पीछे–पीछे नहीं जाना चाहिए । अगर महिला उसकी गुफा में जाएगी तो उस गुफा की रक्षा करने वाला राक्षस महिला को जला देगा ।

महिला पुरुष के पीछे–पीछे गुफा में जाना चाहती है, इस वजह से बहुत सा अनावश्यक तनाव पैदा होता है । महिलाएँ यह समझ ही नहीं पातीं कि परेशान होने पर आदमी को अकेला रहना या चुप रहना अच्छा लगता है । ऐसे वक़्त महिला पूछती है, “क्या कोई समस्या है?” पुरुष जवाब देता है, “नहीं।” परंतु महिला महसूस करती है कि वह परेशान दिख रहा है । इसलिए वह दुबारा पूछती है, “मैं जानती हूँ कि तुम किसी बात से परेशान हो, बात क्या है?”

पुरुष कहता है, “कुछ नहीं।”

महिला फिर पूछती है, “कुछ तो बात है। तुम किसी बात पर परेशान हो । तुम क्या सोच रहे हो?”

वह कहता है, “देखो, मैं ठीक–ठाक हूँ । अब भगवान के लिए मुझे अकेला छोड़ दो!”

महिला दुखी होकर कहती है, “तुम मेरे साथ ऐसा बर्ताव कैसे कर सकते हो? तुम अब मुझसे बिलकुल भी बात नहीं करते । मुझे यह कैसे मालूम हो कि तुम क्या सोच रहे हो? तुम अब मुझसे प्रेम नहीं करते । मुझे लगता है मैं तुम्हारी ज़िंदगी से दूर होती जा रही हूँ ।”

इस बिंदु पर पुरुष अपना आपा खो देता है और कई कटु बातें बोल देता है, जिस पर बाद में उसे अफ़सोस होता है। उसका राक्षस बाहर निकलकर महिला को जला देता है।

जब मंगल ग्रह के लोग बोलते हैं

मंगल ग्रह के लोगों की कई बातें इस बात का संकेत होती हैं कि वे या तो गुफा में चले गए हैं या फिर जाने वाले हैं । इन संक्षिप्त संकेतों से शुक्र ग्रह की महिलाओं को हक़ीक़त समझ लेनी चाहिए और उसे अकेला छोड़ देना चाहिए । जब पुरुष परेशान होते हैं, तो वे यह नहीं कहते, “मैं परेशान हूँ और कुछ देर अकेला रहना चाहता हूँ”, इसके बजाय वे चुप हो जाते हैं।

नीचे छह संक्षिप्त संकेत दिए गए हैं जिनके माध्यम से पुरुष यह बताता है कि वह या तो गुफा में है या फिर वहाँ जा रहा है।

चेतावनी के छह संक्षिप्त संकेत

जब महिला पूछती है, “क्या बात है?”




जब कोई पुरुष ऊपर लिखे हुए संक्षिप्त वाक्य बोलता है, तो वह चाहता है कि उसे अकेला छोड़ दिया जाए और परेशान न किया जाए । ऐसे समय में शुक्र ग्रह की महिलाएँ मंगल / शुक्र डिक्शनरी का सहारा लिया करती थीं ।

महिलाओं को यह समझना चाहिए कि जब पुरुष कहता है “मैं ठीक हूँ” तो वह दरअसल यह कहना चाहता है, “मैं ठीक हूँ क्योंकि मैं इस समस्या को अकेले ही सुलझा सकता हूँ । मुझे किसी की मदद की क़तई ज़रूरत नहीं है । मेरी चिंता छोड़ दो । मुझ पर भरोसा रखो कि मैं अकेला ही इस समस्या को सुलझा सकता हूँ ।”

इस अनुवाद के बिना महिला को लगता है कि पुरुष उसे समस्या इसलिए नहीं बता रहा है क्योंकि वह उससे प्रेम नहीं करता है । नीचे मंगल / शुक्र डिक्शनरी के कुछ वाक्य दिए जा रहे हैं ।

मंगल / शुक्र डिक्शनरी

“मैं ठीक हूँ” का शुक्र ग्रह की भाषा में अनुवाद है, “मैं ठीक हूँ । मैं अपनी समस्या सुलझा सकता हूँ । मुझे मदद की ज़रूरत नहीं है, धन्यवाद ।”

इस अनुवाद के बिना महिला इस वाक्य का यह मतलब निकाल सकती है, “मैं इसलिए परेशान नहीं हूँ क्योंकि मुझे परवाह नहीं है ।” या “मैं तुम्हारे साथ अपनी परेशानी नहीं बाँटना चाहता । मुझे तुम पर विश्वास नहीं है कि तुम मेरा साथ दोगी ।”

“मैं ठीक हूँ” का शुक्र ग्रह की भाषा में अनुवाद है, “मैं इसलिए ठीक हूँ क्योंकि मैं इस समस्या को सफलतापूर्वक सुलझा सकता हूँ । मुझे किसी मदद की ज़रूरत नहीं है । अगर होगी तो मैं माँग लूँगा ।”

इस अनुवाद के बिना महिला इस वाक्य का यह मतलब निकाल सकती है, “जो हुआ है, उसकी मुझे कोई परवाह नहीं है । यह समस्या मेरे लिए महत्वपूर्ण नहीं है । अगर इससे तुम्हें परेशानी होती है, तो होती रहे, मुझे उसकी भी परवाह नहीं है ।”

“कुछ नहीं” का शुक्र ग्रह की भाषा में अनुवाद है, “ऐसी कोई बात नहीं है जिसे मैं अकेला न सुलझा सकूँ । प्लीज़ इस बारे में और सवाल मत पूछो ।”

इस अनुवाद के बिना महिला इस वाक्य का यह मतलब निकाल सकती है, “मैं नहीं जानता कि मैं क्यों परेशान हूँ । मैं चाहता हूँ कि तुम मुझसे सवाल पूछो ताकि मैं जान सकूँ कि समस्या क्या है ।” इसी ग़लतफ़हमी के कारण वह सवाल पूछती जाती है, जबकि पुरुष अकेला रहना चाहता है ।

“सब कुछ ठीक–ठाक है” शुक्र ग्रह की भाषा में इसका अनुवाद है, “समस्या तो है, परंतु तुम उसके लिए दोषी नहीं हो । अगर तुम सवाल पूछकर या सुझाव देकर व्यवधान न डालो, तो मैं अकेला ही इसे सुलझा सकता हूँ ।”

इस अनुवाद के बिना महिला यह समझ सकती है, “यह सब तुम्हारी ग़लती का परिणाम है । तुमने इस बार तो ऐसा कर दिया, परंतु अगली बार ऐसी ग़लती मत करना ।”

“कोई बड़ी बात नहीं है” शुक्र ग्रह की भाषा में इसका अनुवाद है, “यह बड़ी बात इसलिए नहीं है, क्योंकि मैं इसे ठीक कर सकता हूँ । प्लीज़ इस समस्या के बारे में ज्यादा मत सोचो और इसके बारे में बात मत करो । इससे मैं और ज़्यादा परेशान हो जाता हूँ । मैं इस समस्या को सुलझाने की ज़िम्मेदारी अपने ऊपर लेता हूँ ।”

“कोई समस्या नहीं है” शुक्र ग्रह की भाषा में इसका अनुवाद है, “मुझे समस्या को सुलझाने में कोई दिक़्क़त नहीं आ रही है ।”

इस अनुवाद के बिना महिला इसका यह मतलब निकाल सकती है, “यह कोई समस्या नहीं है । तुम इसे समस्या क्यों मान रही हो या मदद क्यों करना चाहती हो?” इसी ग़लतफ़हमी के कारण महिला उसे यह बताने लग जाती है कि यह समस्या गंभीर क्यों है ।

जब पुरुष गुफा में जाए, तो क्या करें

जब पुरुष गुफा में जाए, तो उसे सहारा देने के आप इन छह लिए तरीक़ों का इस्तेमाल कर सकती हैं ।

1.इस बात पर दुखी न हों कि वह आपसे दूर क्यों चला गया ।

2.समाधान सुझाकर उसकी समस्या को सुलझाने में उसकी मदद करने की कोशिश न करें ।

3.वह कैसा महसूस कर रहा है, इस बारे में सवाल पूछकर उसे और परेशान न करें ।

4.उसकी गुफा के दरवाज़े के पास बैठकर उसके बाहर निकलने का इंतज़ार न करें ।

5.उसके बारे में चिंता न करें, न ही उसके लिए दुखी हों ।

6.कोई ऐसा काम करें, जिससे आपको खुशी मिलती है ।

ऐसे समय महिला या तो अपनी किसी सहेली से बातें कर सकती है या फिर पुस्तक पढ़ सकती है, संगीत सुन सकती है, व्यायाम कर सकती है, शॉपिंग कर सकती है, प्रार्थना कर सकती है, टीवी देख सकती है या और भी ऐसे दूसरे काम कर सकती है जिनसे उसे ख़ुशी मिलती हो ।

पुरुष की आलोचना कैसे करें?

उसे सलाह कैसे दें?

महिलाओं को चाहिए कि पुरुषों को बिना माँगे सलाह न दें । इसके बजाय पुरुष जैसा भी है, उसे वर्तमान स्थिति में स्वीकार करें । उसे सबसे पहले इसी बात की ज़रूरत है, उसे लेक्चर की ज़रूरत नहीं है । एक बार आप उसे उसके वर्तमान हाल में स्वीकार कर लेंगी, तो फिर वह ख़ुद ही आपसे सलाह माँगेगा । परंतु अगर उसे लगेगा कि आप उसे बदलना चाहती हैं, तो वह आपसे सलाह या सुझाव नहीं माँगेगा । वैसे सलाह देने के चार तरीके़ संभव हैं :

1.जब पुरुष कपड़े पहन रहा हो, तो महिला पुरुष से यूँ ही कह सकती है, “मुझे तुम पर यह शर्ट अच्छी नहीं लगती । क्या तुम आज रात दूसरी शर्ट पहन लोगे?” अगर वह इस बात से चिढ़ जाए, तो महिला को उसकी संवेदनशीलता का आदर करते हुए तत्काल माफ़ी माँग लेनी चाहिए, “आई एम सॉरी, मैं तुम्हें कपड़े पहनना नहीं सिखा रही हूँ ।”

2.अगर वह इतना संवेदनशील है– और कई पुरुष होते हैं–तो महिला किसी और समय इस बात को कह सकती है । वह कह सकती है, “याद है तुमने उस दिन हरे स्लैक्स पर नीली शर्ट पहनी थी? मुझे वह कॉम्बिनेशन पसंद नहीं आया था । अगर तुम उस शर्ट को ग्रे स्लैक्स के साथ पहनोगे, तो ख़ुब अच्छे दिखोगे ।”

3.वह उससे सीधे पूछ सकती है, “क्या तुम चाहोगे कि मैं तुम्हारे साथ चलकर शॉपिंग करूँ? तुम्हारे लिए कपड़े पसंद करना मुझे अच्छा लगेगा ।” अगर पुरुष मना कर दे, तो फिर उसके पीछे पड़ने की ज़रूरत नहीं है । अगर वह हाँ कह दे, तो उसे डिटेल में सलाह न दें । उसकी संवेदनशीलता का ध्यान रखें ।

4.महिला कह सकती है, “मैं आपसे कुछ कहना चाहती हूँ, परंतु मैं नहीं जानती कि कैसे कहूँ । (थोड़ा रुककर ।) मैं आपको गु़स्सा नहीं दिलाना चाहती, परंतु मैं सचमुच यह कहना चाहती हूँ ।” इस भूमिका से वह किसी बड़े शॉक के लिए तैयार हो जाता है और जब उसे पता चलता है कि बात इतनी छोटी है तो वह खु़श हो जाता है ।

ज़्यादा ध्यान रखा जाए,

तो पुरुष बेचैन हो जाता है

जब मेरी शादी बॉनी से हुई तो शुरुआत में वह मेरा बहुत ध्यान रखा करती थी । जब भी मैं सेमिनार के लिए बाहर जाता था, तो वह मुझसे पूछती थी कि मैं कब उठूँगा । फिर वह पूछती थी कि मेरा हवाई जहाज़ कितने बजे रवाना होगा । फिर वह सोचने लगती थी और मुझे चेतावनी देती थी कि मैं लेट हो जाऊँगा और फ़्लाइट नहीं पकड़ पाऊँगा । हर बार उसे लगता था कि वह मेरा भला कर रही है, परंतु मुझे ऐसा नहीं लगता था । मुझे यह सुनकर चोट पहुँचती थी । मैं शादी से पहले भी चौदह साल से पूरी दुनिया में घूम रहा था और आज तक मेरा एक प्लेन भी नहीं छूटा था ।

सुबह मेरे जाने से पहले वह मुझसे ढेरों सवाल पूछती थी, “तुमने टिकट तो रख लिया? तुम्हारा पर्स तो तुम्हारे पास है? तुम्हारे पास पर्याप्त पैसे तो हैं? क्या तुमने मोज़े रख लिए? क्या तुम्हें पता है तुम कहाँ ठहरने वाले हो?” वह सोचती थी कि वह मुझसे प्रेम कर रही थी, परंतु मुझे लगता था जैसे उसे मुझ पर भरोसा नहीं था और इसलिए मैं चिढ़ जाता था । आख़िरकार मैंने उसे बता दिया कि मैं उसकी प्रेमपूर्ण सलाह का सम्मान करता हूँ, परंतु मैं नहीं चाहता कि वह मुझे बच्चा समझे और एक माँ की तरह मेरी देखभाल करे ।

सफल कहानी

एक बार मैं अपना पासपोर्ट घर पर ही भूल गया । मैंने न्यूयॉर्क से दकैलिफ़ोर्निया फ़ोन करके बॉनी को बताया कि पासपोर्ट वहीं छूट गया है । बॉनी ने यह नहीं कहा, “मैंने तो पहले ही कहा था,” या “ऐसा तो होना ही था,” बल्कि उसने हँसते हुए कहा, “जॉन, तुम्हारे जीवन में कितनी रोमांचक घटनाएँ होती हैं । अच्छा, अब तुम क्या करोगे?”

मैंने उससे कहा कि वह मेरे पासपोर्ट को फै़क्स कर दे और इस तरह समस्या सुलझ गई । उसने मुझे सहयोग दिया, उसने माँ की तरह मुझे सलाह या हिदायतें नहीं दीं । उसने मुझे मौक़ा दिया कि मैं अपनी समस्या खु़द सुलझाऊँ ।

जब भी ग़लतफ़हमियाँ हों, तो सबसे पहले तो यह याद रखें कि आप अलग–अलग भाषाएँ बोलते हैं । डिक्शनरी उठाकर देखें कि आपके पार्टनर की बात का असली मतलब क्या है । इसमें समय तो लगेगा, परंतु खुशहाल जीवन जीने के लिए आपको थोड़े–बहुत समय की कुर्बानी तो देनी ही चाहिए ।





अध्याय 6

पुरुष रबर बैंड की तरह होते हैं


पुरुष रबर बैंड की तरह होते हैं । जब वे दूर जाते हैं तो रबर बैंड की तरह उनके दूर जाने की भी एक सीमा होती है । वे अपने आपको जितना दूर खींच सकते हैं, उतना खींच लेते हैं और फिर तेज़ी से अपनी पुरानी अवस्था में आपके क़रीब लौट आते हैं । पुरुषों की अंतरंगता के चक्र को समझने के लिए रबर बैंड की तुलना आदर्श है । यह चक्र है क़रीब आना, दूर जाना और फिर दुबारा क़रीब आना ।

ज़्यादातर महिलाओं को इस बात से हैरानी होती है कि प्रेम में पुरुष कई बार अपने आपको दूर खींच लेते हैं परंतु कुछ समय बाद दुबारा उनके क़रीब आ जाते हैं । यह पुरुषों का स्वभाव होता है । वह ऐसा जान – बूझकर नहीं करते । ऐसा अपने आप होता है । इसमें न तो पुरुष की कोई गलती है, न ही महिला की । यह तो एक स्वाभाविक चक्र है ।

जब पुरुष अपने आपको दूर खींच लेते हैं, तो महिला इसका गलत मतलब निकाल लेती है । महिलाएँ जब पुरुषों से दूर जाती हैं तो ऐसा तब होता है जब उनका पुरुष पर से विश्वास उठ जाता है, जब वे आहत होती हैं और उन्हें दुबारा चोट पहुँचने का अंदेशा होता है या वे पुरुष से निराश हो जाती हैं क्योंकि उसने कोई ग़लती की है । पुरुष इन कारणों से तो अपने आपको दूर खींचता ही है, परंतु चाहे महिला की गलती न हो, फिर भी वह ऐसा करता है । रबर बैंड की तरह वह अचानक अपने आपको पूरी दूरी तक ले जाता है और फिर अपने आप वापस लौट आता है ।

पुरुष इसलिए भावनात्मक रूप से दूर जाता है क्योंकि वह स्वतंत्रता की अपनी आवश्यकता की पूर्ति करता है । अलग होने और दूर जाने के बाद ही उसे यह एहसास होता है कि उसे प्रेम और अंतरंगता की कितनी ज़रूरत है, और उसके लिए यह चीज़ें कितने मायने रखती हैं । जब पुरुष दुबारा लौटता है तो वह नए सिरे से अंतरंगता शुरू नहीं करता, बल्कि उसी बिंदु से अंतरंगता बढ़ाता है जहाँ से वह दूर गया था ।

हर महिला को पुरुष के बारे में यह पता होना चाहिए

अगर पुरुषों के अंतरंगता चक्र को समझ लिया जाए तो इससे संबंध सुखद रह सकते हैं, परंतु अगर इसे ठीक से न समझा जाए तो अनावश्यक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं । एक उदाहरण देखें ।

मैगी परेशान और तनावग्रस्त थी । वह छह महीनों से अपने बॉय फ्रेंड जेफ़ के साथ डेटिंग पर जा रही थी । सब कुछ बहुत रोमांटिक था । परंतु तभी बिना किसी कारण के जेफ़ भावनात्मक स्वरूप से उससे दूर होने लगा । मैगी इसका कारण नहीं समझ पाई । वह सोचने लगी कि उससे क्या गलती हो गई थी जिस वजह से वह दूर जा रहा हैं ।

जब जेफ़ उससे दूर होने लगा तो मैगी ने इसे अपनी व्यक्तिगत गलती माना । इसीलिए वह अपनी गलती सुधारकर रिश्ते को एक बार फिर प्रगाढ़ बनाने की कोशिश करती रही । परंतु वह जितना क़रीब गई, जेफ़ उससे उतना ही दूर होता गया ।

मेरे सेमिनार में भाग लेने के बाद मैगी को राहत मिली । उसने यह समझ लिया कि जेफ़ के दूर जाने का यह कारण नहीं है कि उससे कोई ग़लती हुई है । कई महीनों बाद मैगी ने मुझे बताया कि जेफ़ के साथ उसकी सगाई हो चुकी है । मैगी ने वह रहस्य जान लिया था जो बहुत कम महिलाएँ जान पाती हैं ।

मैगी ने यह समझ लिया कि पुरुष के दूर जाते समय वह जितना क़रीब जाने की कोशिश करेगी, समस्या उतनी ही बढ़ती जाएगी । दुबारा क़रीब आने के लिए पुरुष को पूरी दूरी तक जाना होता है । तभी उसे अपने प्रेम के महत्व और महिला की ज़रूरत का अंदाज़ा हो